वहीं, फाइल वापस आने पर जब विभागीय अधिकारियों ने देखा तो पता चला कि हस्ताक्षर उनके हैं ही नहीं। मामला नगर निगम में चर्चाओं का विषय बना हुआ है। जांच शुरू कर दी गई है, जिसमें दोष सिद्ध होने पर लिपिक के विरुद्ध कार्रवाई होने की बात कही जा रही है।
विभाग में पहले भी हो चुके फर्जीवाड़े
गृहकर एवं जलकर विभाग में मार्च 2024 में भी फर्जीवाड़ा सामने आया था। नगर निगम के कुछ कर्मचारियों ने नवाबगंज स्थित एक संपत्ति के मामले में राजस्व रिकॉर्ड में बिना किसी ठोस दस्तावेज के स्वामित्व बदल दिया था। मामले में कोर्ट के आदेश पर अधिकारी और लिपिक के विरुद्ध एफआईआर हुई थी। इसके अलावा मार्च ही में हकीकतनगर स्थित एक संपत्ति के वारिसों में असल वारिसों के नाम कटवाकर कुछ लोगों ने वारिस के तौर पर अपना नाम दर्ज करा लिया था। उक्त मामले में भी कोर्ट के आदेश पर एफआईआर हुई थी। दोनों मामलों में विभागीय कार्रवाई के लिए शुरू की गई जांच अभी तक लटकी है।