फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Saharanpur News: 2019 में करारी हार, 2024 में इमरान की जबरदस्त जीत

विज्ञापन
विज्ञापन
सहारनपुर। नवनिर्वाचित सांसद इमरान मसूद का इस चुनाव में चौंकाने वाला प्रदर्शन रहा। सहारनपुर नगर, सहारनपुर देहात और बेहट विधानसभा सीट के पुराने और नए आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां पर 2014 के बाद 2024 में इमरान ने यू-टर्न लिया है। 2019 के चुनाव में इन सीटों पर 1,59,659 वोटों पर ही सिमट गए थे और हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में लग रहा था कि इमरान का जनाधार घट गया है, लेकिन इस चुनाव में इमरान ने इन तीनों विधानसभा में 3,89,752 वोट लेकर बता दिया कि जनाधार बढ़ा है। खास बात यह है कि यह इन तीनों विधानसभा में सैनी, राजपूत, गुर्जर, मुस्लिम, दलित, पंजाबी और वैश्य समाज की अच्छी खासी वोट है।
विज्ञापन

दरअसल, सहारनपुर नगर सीट को भाजपा का गढ़ माना जाता है। हालांकि पुराने शहर में मुस्लिम की तादाद काफी है, लेकिन आंकड़ों को देखें तो भाजपा का वोट प्रतिशत हर बार आगे रहा है। सहारनपुर नगर विधानसभा सीट पर 2014 में इमरान को 109793 वोट मिले थे। 2019 में इस सीट पर इमरान के वोट घटकर मात्र 55069 रह गया। इसी तरह सहारनपुर देहात में 2014 में इमरान को 84823 और 2019 में यह आंकड़ा घटकर 43369 रह गया था।
बेहट विधानसभा में 2014 में 89920 और 2019 में 61221 वोट मिले थे। यानी 2014 में इन सीटों पर इमरान का प्रदर्शन अच्छा रहा था, लेकिन 2019 के चुनाव में उन्हें इन सीटों पर कम ही वोट मिले थे। चर्चाएं होने लगी थीं कि इमरान का जनाधार कम हुआ है। इसके पीछे भी बड़ी वजह बार-बार पार्टी बदलना भी था। वह कभी सपा तो कभी बसपा में रहे। चुनाव से कुछ माह पहले ही बसपा को छोड़कर दोबारा कांग्रेस में आए थे, लेकिन इस बार कांग्रेस में आने का इमरान का फैसला अच्छा रहा और उन्होंने भाजपा को उसी के वोट बैंक के माध्यम से पटखनी दे दी।
विज्ञापन


भाजपा सिर्फ देवबंद और रामपुर मनिहारान में बना सकी बढ़त
सहारनपुर लोकसभा में भाजपा सिर्फ देवबंद और रामपुर मनिहारान विधानसभा में बढ़त बना सकी। देवबंद में भाजपा को 94289 वोट मिले, जबकि इमरान को 73238 वोट मिले। इसी तरह रामपुर मनिहारान में भाजपा को 85950 और इमरान 84393 के मामूली अंतर से पीछे रहे, जबकि 2019 के चुनाव में भाजपा को इन दोनों विधानसभा में एक-एक लाख से ज्यादा वोट मिले थे। इस बार बढ़त भले ही बना ली हो, लेकिन पिछले चुनाव के मुकाबले भाजपा का जनाधार कम हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें