चिलकाना(सहारनपुर)। भैयादूज पर भाई के नहीं आने से बहन इस कदर आहत हुई कि उसने रविवार की सुबह मिट्टी का तेल छिड़क आग लगाकर जान दे दी। ससुराल और मायका पक्ष के लोगों ने मामले में कोई भी कार्रवाई करने से इनकार कर दिया, लेकिन पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
यह हृदय विदारक घटना दूधगढ़ गांव में हुई। यहां रहने वाले जयपाल की पत्नी सुनीता (35) शनिवार को भैयादूज पर अपने भाई के आने का बेसब्री से इंतजार करती रही, लेकिन किसी कारणवश भाई नहीं आ पाया। भाई के नहीं आने से सुनीता इस कदर आहत हुई कि रविवार की सुबह करीब सात बजे उसने अपने ऊपर मिट्टी का तेल छिड़कर कर आग लगा ली। सुनीता का शोर सुनकर कमरे में लेटा जयपाल बाहर आया तो सुनीता को आग की लपटों में घिरा देखा। उसने तुरंत उसके ऊपर रजाई डालकर आग बुझाई।
शोर सुनकर पास-पड़ोस के लोग भी जमा हो गए। गंभीर रूप से झुलसी सुनीता को तुरंत चिकित्सक के यहां ले जाया गया, लेकिन तब तक उसने दम तोड़ दिया। पति जयपाल ने बताया कि सुनीता भैयादूज पर दिनभर खेड़ा अफगान निवासी अपने भाई रमेश के आने का इंतजार करती रही। भाई के नहीं आने पर वह काफी दुखी थी। रात को उसने उसे काफी समझाया था, लेकिन उसे क्या पता था कि वह ऐसा कदम भी उठा लेगी।
घटना का पता चलने ही सुनीता के परिजन भी सुसराल आ पहुंचे। ससुराल और मायके पक्ष के लोग बिना किसी कार्रवाई के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे कि पुलिस और नायब तहसीलदार प्रेम चंद मौके पर पहुंचे। उन्होंने महिला का शव को कब्जे में ले लिया। परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम नहीं कराने के बारे में उच्चाधिकारियों से भी बात की, लेकिन अधिकारियों ने इनकार कर दिया। इसके बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।