... गैर को भी गले से लगाएंगे हम
देवबंद (सहारनपुर)। जश्न-ए-आजादी के मौके पर मोमिन कांफ्रेंस की ओर से पूर्व सांसद, लेखक व कवि स्व. श्रीकांत वर्मा की स्मृति में ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया गया। जिसमें देश के नामचीन शायरों ने उम्दा कलाम पेश कर देर रात तक श्रोताओं से जमकर दाद बटोरी।
मधुर मिलन बैंक्वेट हाल में आयोजित हुए ऑल इंडिया मुशायरे का उद्घाटन दिल्ली के उद्योगपति अभिषेक वर्मा व उनकी पत्नी पूर्व मिस यूनिवर्स रोमानिया व उलाला वर्ल्ड की चेयरपर्सन एंका वर्मा ने फीता काटकर किया। मुशायरे की शुरूआत शायर नदीम फर्रुख ने नात-ए-पाक पढ़कर की। इसके बाद प्रसिद्ध शायर जौहर कानपुरी ने कुछ यूं कहा.. रूप बदला, रंग बदला और सुनहरा हो गया, फूल जब पूरा खिला तो उसका चेहरा हो गया। अज्म शाकरी ने पढ़ा.. आ मेरी मौत मेरी जान बचा ले आकर, जिंदगी रोज मुझे जेरो जबर करती है। हाशिम फिरोजाबादी ने कहा.. जो न अब तक हुआ कर दिखाएंगे हम, गैर को भी गले से लगाएंगे हम, अपने हिंदुस्तां को खुदा की कसम, फिर से सोने की चिड़िया बनाएंगे हम। शायरा शबीना अदीब ने अपनी दिलकश आवाज में कुछ यूं कहा..ये हकीकत है कोई फसाना नहीं, कद्र औहदे की है आदमी की नहीं, जैसे ही लाल बत्ती हटी कार से, जितने चेहरे थे सब अजनबी हो गए। अलताफ जिया ने कहा..जो दिल में है तहरीर में जम क्यों नहीं होता, कागज से मेरा दर्द रकम क्यों नहीं होता, मैने तो जलाए हैं दीये फिर भी अंधेरा, बढ़ता ही चला जाता है कम क्यों नहीं होता। डा. नदीम शाद ने पढा.. जाने किसका हक दबाकर घर में दौलत लाए हो, और उस पर ये सितम इसमें भी बरकत चाहिए। हास्य शायर बिलाल ने कहा.. देखने छत पर गया था जिसको मैं, उसने ही सीढ़ी हटा दी क्या करुं। अब्दुल्ला राज ने कुछ यूं बयां किया.. तिरंगे की हमें अजमत है अपनी जां से प्यारी, तिरंगे के लिए हम जान भी कुरबान कर देंगे ने सुनाकर श्रोताओं से जमकर दाद बटोरी। इनके अलावा राशिद कमाल, अब्दुस्सलाम खोकर, हरकत हौलट, अलीम वाजिद, रिफअत जमाल, ईशा नाज आदि ने भी अपने कलाम पेश किए। मुशायरा संयोजक जावेद आसी व डा. जुबैर अंसारी ने अभिषेक वर्मा और एंका वर्मा को शॉल ओढ़ाकर व स्मृति चिंह देकर सम्मानित किया। अध्यक्षता डा. कमरुज्जमा कुरैशी व संचालन नदीम फर्रुख ने किया। इस मौके पर सैय्यद ईसा, शुभम चौधरी, शाहिद अंसारी, औसाफ सिद्दीकी, असलम कुरैशी, सरवर खान, सादिक, हाजी वहीद, इस्लाम आदि मौजूद रहे।