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आते रहे शव, जलती रहीं चिता, घरों में क्रंदन

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सहारनपुर। जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद गांवों में चीख पुकार के साथ परिवार का रुदन हर किसी को दहला रहा है। हर आंख में आंसू है। किसी ने सोचा भी नहीं था कि ऐसा भी दिन आएगा कि गांव में एक के बाद एक शव आते रहेंगे और लोग उनके अंतिम संस्कार में ही लगे रहेंगे। शनिवार को दिन भर गांव में शव आते रहे और उनका अंतिम संस्कार होता रहा। एक साथ चार-चार शवों को लेकर लोग चले तो जैसे की हर किसी की रूह तक कांप उठी।
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जहरीली शराब के सहारनपुर में ऐसा कहर बरपाया कि हर ओर त्राहि-त्राहि मची हुई है। बेबस गरीबी पर मौत के इस झपट्टे से इस कदर कोहराम मचाया कि लोग शवों की गिनती करने में ही लगे रहे। किस घर में कितनी मौतें हुईं, गांवों में यह चर्चा होती रही। जैसे-जैसे गांवों में शव पहुंचते रहे, घरों से चीखने, बिलखने की आवाजें आती रही। गांव के गांव मातम में डूब कर रह गए।
गांव कोलकी, उमाही कोटा में ही मरने वालों की संख्या लगभग 26 तक पहुंच गई। आलम यह था कि गांव कोलकी कलां में चाचा भतीजों का शव आगे पीछे ही श्मशान तक ले जाया गया। चाचा नाथीराम का शव लेकर लोग चले, उसके पीछे उसके भतीजे गुलाब सिंह का शव था। वहीं, शीशपाल और उसके भतीजे रीनू कुमार को भी जहरीली शराब ने अपना शिकार बनाया। इनके शव भी घर के आंगन से एक साथ उठाए गए। इस गांव के रमेश, संजय, दिलीप, पिंटू, बेनाम, नीरज, अरुण, गुलशन, सुरेश तथा जगन्नाथ की जिंदगी जहरीली शराब के घूंट ने निगल ली।
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वहीं, गांव उमाही कोटा में 12 अर्थियां श्मशान पहुंचीं, तो दो के शव कब्रिस्तान ले जाकर सुपुर्द ए खाक किए गए। गांव उमाही से करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर मुजफ्फरनगर-सहारनपुर हाईवे किनारे ईंट भट्ठे के पास श्मशान था। श्मशान की जगह करीब 200 वर्ग गज थी, लेकिन वहां शुक्रवार रात से शनिवार तक एक एक करके 14 लोगों के शवों का अंतिम संस्कार किया गया। इस गांव के बल्लू, तेजपाल, अरविंद, राजू, पिंटू, कंवरपाल, सुरेंद्र, जल सिंह, श्यामो, राजकुमार, पालू, राजेश की चिताएं जलती रहीं। जबकि रिजवान और इमरान को दफनाया गया।
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