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सेहत के लिए खतरनाक है आतिशबाजी से होने वाला प्रदूषण

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सहारनपुर। दीपावली पर आतिशबाजी से होने वाला प्रदूषण सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। बम (पटाखे) के धमाके से हार्टअटैक और धुएं से सांस की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। आतिशबाजी चलाते समय बरती गई लापरवाही जान पर आफत बन सकती है।
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महानगर के वरिष्ठ फिजीशियन डाक्टर संजीव मिगलानी ने बताया कि ज्यादा धुएं वाले पटाखों में एसपीएम, कार्बन मोनो आक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड बहुत ज्यादा होते हैं, जिनसे दमा, सांस की नली में सूजन, नजला, साइनोसाइटिस, लेरनजाइटिस का खतरा बढ़ जाता है। सामान्य इंसान के कान की क्षमता 60 डेसीबल होती है। तेज धमाके वाले बम से ब्लड प्रेशर के बढ़ने, हार्टअटैक, बेचैनी, नींद न आना और बहरापन होने की संभावना बढ़ जाती है। हरे रंग की रोशनी वाली आतिशबाजी में बेरियम होता है, जो जहरीला है। नीले रंग की रोशनी वाले पटाखों में कॉपर होता है, जिससे कैंसर होता है।
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बरतनी चाहिए यह सावधानियां
-- पटाखे जलाने पूरी प्रक्रिया को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।
-- आंखों पर चश्मा लगाकर आतिशबाजी चलानी चाहिए।
-- पटाखे खुले स्थान पर जलाएं और पास में पानी की व्यवस्था रखें।
-- हाथ में लेकर पटाखे न चलाएं और कपड़ों से दूर रखें।
-- आतिशबाजी चलाते समय आसपास वाहन न पार्क करें।
-- पालतू जानवरों को पटाखों से दूर रखें।
-- कोई पटाखा पहली बार में न जले तो 15 से 40 मिनट तक इंतजार करें। उसे तुरंत दोबारा जलाने का प्रयास न करें और पानी डालकर बुझा दें।
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