सहारनपुर। 44 डिग्री तापमान चल रहा है। भीषण गर्मी से बचने के लिए अधिकारियों से लेकर डॉक्टर के दफ्तरों में एसी और कूलर चलते हैं, लेकिन टीबी अस्पताल ऐसा है, जहां अगर बिजली चली गई तो जेनरेटर छोड़ो इनवर्टर भी नहीं चलता। हालात बद से बदतर है। भीषण गर्मी के कारण वार्ड में भर्ती मरीज तपते रहते हैं। टीबी के साथ ही वह गर्मी से भी जूझ रहे हैं। तीमारदार अपने मरीजों की हाथ वाले पंखे से हवा करने को मजबूर हैं। शनिवार को अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया तब ऐसे हालात नजर आए।
टीबी अस्पताल 86 बेड का है। इसमें 16 बेड के वार्ड में एमडीआर (मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट) मरीज भर्ती होते हैं। एमडीआर टीबी के गंभीर मरीज होते हैं। सामान्य वार्ड 35-35 बेड के हैं। शुक्रवार रात बिजली जाने के बाद तीमारदार अपने मरीजों की हाथ वाले पंखे से हवा करते रहे। काफी देर बाद भी बिजली नहीं आई तो कुछ मरीज बाहर गैलरी में आकर बैठ गए। शनिवार को टीम ने टीबी अस्पताल का लाइव किया तो व्यवस्था बद से बदतर मिली। पुरुष वार्ड के बाहर बैठे तीमारदार व्यवस्थाओं को कोसते नजर आए। उनका कहना था कि बिजली जाने पर जनरेटर नहीं चलता है। वार्ड में एक लाइट जलती है। बाकी बंद रहती है। महिला वार्ड प्रथम तल पर बना है। वह गर्मी में तप रहा है। मरीज और उनके तीमारदार गैलरी में सोते हुए मिले।
रात में मच्छर सोने नहीं देते
टीम के सामने मरीजों के तीमारदारों का दर्द झलका। महिला वार्ड के बाहर बैठी महिला तीमारदारों का कहना था कि रात में मच्छर सोने नहीं देते हैं। वार्ड में लेटे तो भरोसा नहीं की बिजली कब चली जाए। गर्मी से पूरा वार्ड तपता है। बेहट निवासी आशमा का कहना है कि ससुर अब्दुल सलाम तीन दिन से भर्ती हैं। अस्पताल की व्यवस्था बिल्कुल खराब है। किसी की कोई सुनने वाला नहीं है।
डर की वजह से नहीं करते शिकायत
कुछ तीमारदार ऐसे भी मिले, जो मरीज के इलाज में लापरवाही बरतने के डर से शिकायत नहीं करते। उन्होंने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि टीबी अस्पताल की व्यवस्था चौपट हो गई है। सफाई पर भी कोई ध्यान नहीं दिया जाता है।
टीबी अस्पताल के वार्डों में बिजली जाने के बाद जनरेटर नहीं चलता है, इसकी जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो मामला गंभीर है। बिजली जाने पर जनरेटर चलना चाहिए, ताकि मरीज गर्मी में न रहें।
- डॉ. कुमुद रानी, एडी हेल्थ