सहारनपुर। एससीएसटी एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में दलित संगठनों द्वारा किए बंद और हुई हिंसक घटनाओं की व्यापारियों ने निंदा की है। व्यापारियों का कहना है कि हिंसा से हर वर्ग का नुकसान होता है। कानून हाथ में लेने का किसी को अधिकार नहीं है।
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सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला सुनाया है, उसका सम्मान करना चाहिए। अगर किसी को इस फैसले पर आपत्ति है तो वह कानून के दायरे में अपनी बात रखे। कुछ राजनीतिक दलों ने वोट बैंक की राजनीति के चलते बंद का आहृवान करने वाले लोगों को उकसा कर हिंसा कराई है, जिसकी वह कड़े शब्दों में निंदा करते हैं।--------रवि जुनेजा, व्यापारी
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कानून हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है। शांतिपूर्ण रूप से विरोध दर्ज कराया जा सकता था। हिंसा से हर वर्ग को नुकसान पहुंचा है। व्यापारियों के अलावा आम जनमानस को भी हानि हुई। इसके साथ ही जिन लोगों ने हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया है। कहीं ना कहीं उन्हें भी नुकसान पहुंचा होगा।-------दानिश आजम, व्यापारी नेता
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आंदोलन के जरिए विरोध दर्ज करना सबका अधिकार है। मगर, किसी को आंदोलन के जरिए नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। सरकारों को भी चाहिए कि वह आंदोलन करने वाले लोगों की समस्या के बारे में पूछे और समाधान के लिए पहल करे।------------वैैभव भाटिया, व्यापारी
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लोकतंत्र में आंदोलन करने का अधिकार सबको है। मगर, कानून हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है। शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करके अपनी बात रखी जा सकती है। पुलिस-प्रशासन की सूझबूझ से सहारनपुर में कोई बड़ी घटना नहीं हुई है। मगर, जिन जिलों में घटनांए हुई हैं, उसकी वह कड़े शब्दों में निंदा करते हैं।--------शीतल टंडन, व्यापारी नेता