सहारनपुर। नजूल की संपत्तियों पर कब्जे, उनकी बिक्री और स्वरूप बदलने के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। प्रशासन नजूल भूमि को लेकर रिपोर्ट तैयार करा रहा है। जनपद में नजूल की 3.58 लाख वर्ग मीटर भूमि है। सबसे अधिक भूमि नगर निगम क्षेत्र में है।
ब्रिटिश शासन के दौरान अंग्रेजों ने विद्रोह करने वाले लोगों की जमीनें जब्त कर ली थी। आजादी के बाद जब अंग्रेज गए और मालिकों के पास वैध दस्तावेज (डॉक्यूमेंट्स) नहीं थे, तो सरकार ने इन जमीनों को नजूल भूमि घोषित करते हुए अपने कब्जे में ले लिया। प्रशासन जिले में मौजूद भूमि का सत्यापन किया गया। साथ ही वर्तमान स्थिति का पता लगाया गया। नगर निगम के पास करीब 2.55 वर्गमीटर भूमि है, जबकि नगर पालिका परिषद सरसावा के पास 38,126, सुल्तानपुर चिलकाना में 48,325.77, देवबंद में 14,745.62 और गंगोह में 1,903 वर्गमीटर क्षेत्रफल नजूल भूमि में दर्ज है। वहीं निगम क्षेत्र में 191 मामलों के 25,652.58 वर्गमीटर फ्रीहोल्ड हो चुके हैं। 137 मामले निरस्त किए गए हैं। इसके अलावा 206 मामले लंबित हैं, जिनका क्षेत्रफल 35,934.11 है। पांच मामलों में आवेदन प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। वहीं भूमि पर सरकारी दफ्तर भी बने हैं।
कोर्ट रोड, जीपीओ रोड और रेलवे रोड पर हैं जमीनें
शहर में नजूल की ज्यादातर जमीन कोर्ट रोड पर घंटाघर से कोर्ट रोड पुल तक, जीपीओ रोड पर और रेलवे रोड पर हैं। यहां कई आवंटियों पर जमीनों को बेचने तक के आरोप लगे हैं। कइयों ने संपत्तियों के स्वरूप बदलकर होटल, मार्केट और शोरूम बना दिए। इसको रोकना नगर निगम की जिम्मेदारी थी, लेकिन नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी सोते रहे। संपत्तियों में कई नेताओं के भी नाम शामिल हैं।
नजूल भूमि को लेकर रिपोर्ट तैयार की गई है। इसमें फ्रीहोल्ड, सार्वजनिक समेत अन्य जानकारी शामिल की गई हैं। रिपोर्ट को उच्चाधिकारियों को भेजा जा चुका है।
- सलिल कुमार पटेल, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व