सहारनपुर। मुजफ्फरनगर में बुढ़ाना मोड़ पर दो स्कूल बसों के बीच हुई भिड़ंत में दधेडू निवासी भाई-बहन समीर तथा माहा की मौत हो गई। वहीं, दस से अधिक स्कूली बच्चे घायल हो गए। ऐसे हादसे की जनपद सहारनपुर में भी आशंका है। यहां पर भी दो वर्ष से स्कूली बसें खड़ी हैं, उनकी न तो सर्विस हुई और न ही फिटनेस। अब स्कूल खुलने पर बसें बच्चों को स्कूल लेकर जाने लगी हैं। मुजफ्फरनगर के हादसे के बाद यहां अभिभावकों में भी बच्चों को चिंता है। उधर, इस हादसे के बाद संभागीय परिवहन विभाग ने बस मालिकों को बसों की फिटनेस कराने के निर्देश दिए हैं।
संभागीय परिवहन विभाग के अनुसार जनपद में 732 स्कूली बसों का पंजीयन है। हालांकि यह संख्या अधिक हो सकती है, क्योंकि कुछ वाहन परिवहन विभाग में तो पंजीकृत हैं, मगर उनका उल्लेख स्कूलों में ट्रांसपोर्ट का नहीं है। इसके बावजूद वे बच्चों को लाने व ले जाने में लगी हैं। कोरोना संक्रमण के चलते बीते दो वर्षों से स्कूलों में लगी अधिकतर बसें खड़ी हुई थीं। कोरोना संक्रमण के दौरान जहां स्कूल-कॉलेज बंद रहे। अब खुलने पर अधिकतर अभिभावक बच्चों को खुद ही स्कूल छोड़ना पसंद किया।
हाल ही में विधानसभा चुनाव होने पर प्रशासन ने स्कूली बसों का अधिग्रहण किया तो कुछ बसों की सर्विस की गई। अब भी जनपद में पंजीकृत 320 स्कूली बसों की फिटनेस नहीं कराई गई। स्कूलों में बसें लगाने वाले ट्रांसपोर्टर गुलशन गुंबर का कहना है कि उनके पास 35 बसें हैं, ये बीते दो साल से खड़ी हैं। इससे काफी नुकसान हुआ है। सर्विस भी नहीं कराई गई। अब चुनाव में कुछ बसों भेजा गया है। हाल में स्कूल खुले तो मात्र पांच बसें ही चली हैं। बाकी खड़ी हैं।
वहीं, एआरएम रामप्रकाश मिश्रा का कहना है कि अभी 300 से अधिक स्कूल बसों की फिटनेस नहीं हुई है। बस मालिकों को स्कूलों में बस भेजने से पहले फिटनेस व सर्विस कराने के निर्देश दिए हैं।