सहारनपुर। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक कारी सैय्यद इसहाक गोरा के नेतृत्व में बनाई गई हेल्पलाइन पर शुक्रवार को भी रोजेदारों ने सवाल पूछकर अपनी शंकाओं को दूर किया।
सवाल-नदीम कालोनी निवासी अदनान ने पूछा कि इस्लाम में जकात की क्या अहमियत है। किसी मुस्लिम व्यक्ति पर जकात फर्ज है और वह जकात नहीं देता तो शरीयत में क्या हुकुम है।
जवाब- इस्लाम में जकात की बड़ी अहमियत है। नमाज और रोजे की तरह एक फर्ज इबादत भी है। कुरान-ए-पाक में तकरीबन 82 स्थानों पर नमाज के साथ जकात का जिक्र किया गया है। हदीस में बताया गया कि पैगंबर मोहम्मद साहब ने फरमाया कि जिस व्यक्ति को अल्लाह ने माल अता किया और फिर भी उसने जकात अदा नहीं की तो कयामत के रोज ये माल उसके गले में एक बड़े जहरीला सांप की तरह फंदे के रूप में डाल दिया जाएगा।
सवाल-मुजफ्फरनगर निवासी नौशाद ने पूछा कि वह रोजे की हालत में दांतों में फंसा हुआ पदार्थ निकाल रहे थे कि अचानक दांत से खून निकल आया। ऐसी सूरत में उनका रोजा रहा या नहीं?
जवाब- शरीयत में आया है कि अगर किसी व्यक्ति के रोजे की हालत में दांतों से खून निकल आए। मगर हलक में ना जाए तो रोजे पर कोई फर्क नहीं आएगा।
सवाल-रसूलपुर निवासी फरहा ने पूछा कि वह रोजे से हैं। उनकी आंखों में एलर्जी हो रही है। आंखों में आई ड्राप डालना चाहती हैं, लेकिन उनके पिता कहते हैं कि आंखों में दवा डालने से रोजा टूट जाता है।
जवाब- शरीयत में आया है कि अगर कोई व्यक्ति रोजे की हालत में आंखों में दवा डालता है तो इससे रोजे कोई असर नहीं पड़ेगा।