सहारनपुर। उद्योग लगाने के नाम पर बैंकों से करोड़ों रुपये का कर्ज लेने वाले 21 हजार से अधिक उद्यमी किस्त चुकाए बिना गायब हो गए हैं। जिले में 208 करोड़ रुपये से अधिक की रकम डूबने की कगार पर है। बैंकों ने इन खातों को एनपीए घोषित कर दिया है और नोटिस जारी किए जा रहे हैं। अभी तक की जांच में यह भी आया है कि इन्होंने लोन लेने के लिए उद्योग भी नहीं लगाया।
जिले में विभिन्न बैंकों की 300 से अधिक शाखाएं हैं। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग से जुड़े 38,356 उद्यमियों को बैंकों ने 3781 करोड़ रुपये का ऋण दिया था। इनमें से 21,630 उद्यमी बैंकों के करीब 208 करोड़ रुपये नहीं दे रहे हैं। ऋण जारी होने के बाद उद्यमियों ने एक भी किस्त का भुगतान नहीं किया। इस कारण इन खातों को बैंकों ने एनपीए घोषित कर दिया है। इनमें खादी, कपड़ा, हार्डवेयर, जनरल मर्चेंट, कुटीर उद्योग सहित अन्य कई क्षेत्र शामिल हैं। कुछ ने ऋण लेकर उद्योग भी शुरू नहीं किए। सबसे अधिक कर्ज सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों का फंसा है। नोटिस भी भेजे जा रहे हैं। बड़ी संख्या में ऋण वापस न करने से कहीं न कहीं वित्तीय स्थिति पर भी प्रभाव पड़ता है।
अब वसूली पर बैंकों का जोर
बैंकों से ऋण लेने के बाद उसे वापस न करने वालों पर बैंक भी सख्ती कर रहे हैं। नोटिस के साथ ही वसूली प्रक्रिया भी तेजी लाई जा रही है। बैंकिंग अधिकारी बताते हैं कि डिजिटल और आसान ऋण के कारण बड़ी संख्या में ऋण वितरित किए गए। बाद में किस्तों में देरी होने लगी। जिन खाताधारकों ने एक भी किस्त जमा नहीं की। उन्हें एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) घोषित कर दिया गया है।
प्रमुख सार्वजनिक बैंकों के एनपीए खाते
बैंक का नाम-खाते-राशि(करोड़ रुपये में)
बैंक ऑफ बड़ौदा-2400-13.31
बैंक ऑफ इंडिया-1797-13.94
केनरा बैंक-1308-21.19
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया-636-7.34
इंडियन बैंक-171-1.74
पंजाब नेशनल बैंक-8602-70.52
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया-1216-11.11
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया-499-9.63
वर्जन
ऋण लेने के बाद करीब 21 हजार खाताधारकों ने एक भी किस्त जमा नहीं की। पता चला है कि कुछ ने उद्योग भी शुरू नहीं किए। ऐसे में अब इन पर वसूली की तैयारी की जा रही है।
- नवनीत शर्मा, एलडीएम