राजनीतिक दलों ने जताई संवेदना
सहारनपुर। जहरीली शराब पीने से हुई मौतों ने जनपद वासियों को झकझोर दिया है। विभिन्न राजनीतिक दलों ने घटना की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि पीड़ितों का इलाज सही प्रकार से किया जाए और मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिलाया जाए।
सपा जिलाध्यक्ष चौधरी रूद्रसैन ने कहना है कि पार्टी की पूरी सहानुभूति जहरीली शराब के पीड़ित परिवारों के साथ है। हम प्रभावित गांवों में जाकर पीड़ितों को ढांढस बंधा रहे हैं। उन्होंने कहा कि घटना के कारणों की गंभीरता से जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। मृतकों के परिजनों को दिए जाने वाले मुआवजे की राशि काफी कम है, इसे बढ़ाया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय लोकदल के जिलाध्यक्ष राव कैसर सलीम ने कहा कि जहरीली शराब के सेवन से बड़ी संख्या में हुई लोगों की मौत जिला प्रशासन की विफलता है। केवल आबकारी अधिकारी और पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई कर बडे़ अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। उन्होंने मुआवजे को नाकाफी बताते हुए इसे बढ़ाने और दोषियों के खिलाफ धारा 302 के तहत अपराध पंजीकृत करने की मांग की।
कांग्रेस जिला प्रवक्ता गणेश दत्त शर्मा का कहना है कि यह घटना शासन और प्रशासन की विफलता है। दूसरे दिन भी लोग मर रहे हैं, इससे घटना की गंभीरता जाहिर हो रही है। पार्टी के लोग प्रभावित गांवों में जाकर पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधा रहे हैं। उन्होंने मुआवजा की राशि को कम बताया और घटना की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी के जिला मंत्री राव दाउद ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख और बीमारों को दो-दो लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जहरीली शराब कांड के पीछे सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार को भी दोषी ठहराया। उन्होंने दोषी अधिकारियों के खिलाफ निलंबन और कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।
भाजपा जिलाध्यक्ष बिजेंद्र कश्यप का कहना है कि घटना के कारणों की जांच हो रही है। चाहे दोषी कितना भी बड़ा हो, बख्शा नहीं जाएगा। अभी पूरा फोकस पीड़ित व्यक्तियों की जान बचाने पर है। पार्टी के लोग भी प्रभावित गांवों में पहुंचकर सांत्वना दे रहे हैं। भविष्य में ऐसी घटनाएं ना हों इसके लिए ठोस योजना बनाई जाएंगी।
बसपा जिलाध्यक्ष ऋषिपाल सिंह ने जहरीली शराब कांड को प्रदेश की भाजपा सरकार की विफलता करार दिया। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन पर शासन का दबाव होता तो जनपद में जहरीली शराब की बिक्री पर अंकुश लगता। उन्होंने दो लाख रुपये के मुआवजे को नाकाफी बताते हुए कहा कि इसे बढ़ाया जाए और मृतक के परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए।