उग्र छवि के विपरीत अनुशासन में नजर आए भीम आर्मी समर्थक
सहारनपुर। भीम आर्मी जिलाध्यक्ष के भाई सचिन वालिया की मौत के मामले में बुधवार को उग्र रहे समर्थक बृहस्पतिवार को पूरी तरह अनुशासन में नजर आए। मौका भी गम के माहौल का था, वह अपने साथी को अंतिम विदाई देने आए थे। समाज में उग्र छवि बनाने वाले भीम आर्मी कार्यकर्ताओं की वाणी में भी नरमी थी। अंतिम क्रिया के बाद पदाधिकारियों ने कार्यकर्ताओं की टोलियों को सड़क पर रुकने नहीं दिया। बाकायदा हाथ जोड़कर उन्हें अपने-अपने घर लौटा दिया।
गठन के बाद से भीम आर्मी की छवि उग्र संगठन वाली रही है। सहारनपुर हिंसा के बाद भीम आर्मी सुर्खियों में आ गई थी। भीम आर्मी जिलाध्यक्ष कमल वालिया के भाई सचिन वालिया की मौत के मामले में बुुधवार को समर्थकों ने जिस तरह के तेवर दिखाए थे, उससे टकराव की स्थिति बनी हुई थी। पुलिस से धक्का-मुक्की करने के साथ अधिकारियों को आड़े हाथों लिया गया। देर रात तक स्थिति तनावपूर्ण रही। बृहस्पतिवार सुबह रामनगर में जाम लगा तो माहौल खराब होने की आशंका जताई जाने लगी। स्थिति वैसी ही थी, जो पिछले साल नौ मई को बन गई थी। रामनगर पूरी तरह छावनी के रूप में तब्दील था। बाकायदा समर्थकों ने बैरियर लगाकर रास्ता रोक दिया था। पुलिस और प्रशासन भी दूर से स्थिति पर नजर गढ़ाए रहा। सचिन वालिया की अंतिम क्रिया पूरी करने के बाद कार्यकर्ताओं को रामनगर में रुकने नहीं दिया गया। आर्मी के पदाधिकारी कार्यकर्ताओं को अनुशासन में रहने की अपील कर रहे थे। कुछ देर बाद ही खुद ही रास्ता खोल दिया।
भीम आर्मी का बदला हुआ स्वरूप वाकई चौंकाने वाला था, क्योंकि कल और आज के तेवरों में जमीन आसमान का अंतर था। माना जा रहा है कि सचिन वालिया की मौत को लेकर प्रशासन द्वारा उठाए गए सवालों ने कहीं न कहीं भीम आर्मी को विचलित किया है। दूसरा प्रशासनिक अधिकारी तत्काल एफआईआर और मांगों के अनुरूप प्रस्ताव भेजने का आश्वासन देकर पदाधिकारियों को कही ना कहीं संतुष्ट करने में कामयाब रहे। जिसके चलते भीम आर्मी पदाधिकारियों ने किसी भी प्रकार की उग्र प्रदर्शन करने वालों को शांत कर समझाबुझा कर घर भेज दिया।