चिलकाना। सुल्तानपुर के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था भवनों की कमी के बोझ तले दम तोड़ रही है। 190 छात्र-छात्राओं के लिए महज दो कमरे होने से पांचों कक्षाओं की पढ़ाई एक साथ करानी पड़ रही है। बच्चे आमने-सामने बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं, जबकि शिक्षक भी सीमित संसाधनों में व्यवस्था संभालने की जद्दोजहद कर रहे हैं। तीन वर्ष पहले जर्जर भवन गिरा दिए गए, लेकिन नए कमरे अब तक नहीं बने। हालात यह है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दावे कागजों तक सीमित हैं और बच्चे बदइंतजामी की छांव में भविष्य संवारने पर लगे हैं।
विद्यालय में प्रधानाध्यापक सहित छह शिक्षक तैनात हैं। व्यवस्था बनाए रखने के लिए दो कमरों के बीच बरामदे में टीन शेड डाले गए हैं, जहां दो कक्षाओं के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। एक कमरे में दो कक्षाएं और दूसरे कमरे में एक कक्षा संचालित की जा रही है। एक साथ कई कक्षाओं के संचालन से बच्चों और शिक्षकों को पढ़ाई-लिखाई में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय में पहले तीन अतिरिक्त कमरे मौजूद थे, लेकिन उनकी स्थिति जर्जर होने के कारण शिक्षा विभाग ने करीब तीन वर्ष पूर्व सुरक्षा की दृष्टि से उन्हें ध्वस्त करा दिया था। इसके बाद से नए कमरों का निर्माण नहीं कराया जा सका है।
विद्यालय परिसर में उपलब्ध भूमि भी सीमित है। शिक्षकों के अनुसार यदि उपलब्ध स्थान पर मानकों के अनुरूप नए कमरे बनाए जाते हैं तो विद्यालय में बच्चों के आवागमन के लिए पर्याप्त रास्ता नहीं बचेगा। इससे भविष्य में और अधिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। जिन दो कमरों में दो-दो कक्षाओं के बच्चों को बैठाया गया है, उसमें शिक्षक आधे बच्चों का मुंह एक तरफ कर देते हैं तथा आधे बच्चों का मुंह दूसरी तरफ कर देते हैं। तब उन्हें पढ़ाया जाता है। एक जगह पढ़ने से दोनों कक्षाओं के बच्चे शिक्षण कार्य ठीक ढंग से समझ नहीं पाते हैं।
यह बोले स्थानीय निवासी
- क्षेत्रीय सभासद ममता जैन का कहना है कि विद्यालय में भवन की समस्या से संबंधित जानकारी विभागीय अधिकारियों को समय-समय पर भेजी जाती रही है। नए कक्षों के निर्माण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
- अभिभावक मोहम्मद इरशाद ने बताया कि स्कूल में बच्चों की संख्या ज्यादा है, जबकि उनके बैठने का स्थान बहुत कम है। विभाग को चाहिए कि वह जल्दी से जल्दी स्कूल में कमरे की व्यवस्था करें, ताकि बच्चे आराम से बैठकर पढ़ सकें।
- अभिभावक रूपा ने बताया कि उनके दो बच्चे इस स्कूल में पढ़ रहे हैं। बच्चों के बैठने तक की सही व्यवस्था नहीं है। ऐसे में पढ़ाई के दौरान उन्हें दिक्कत आती है।
- अभिभावक रानी ने बताया कि जब एक कमरे में दो कक्षा के बच्चे बैठेंगे, तो बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो जाएगा। हर कक्षा के लिए अलग-अलग कमरे होने चाहिए।