सहारनपुर। जनपद में पंजीकृत पैथोलॉजी लैबों पर नियमों का पालन नहीं हो रहा है, तो बड़ी संख्या में अपंजीकृत लैब चल रही हैं। कई लैब बिना पैथोलॉजिस्ट के चल रही हैं। चिकित्सा विभाग भी चूहे बिल्ली का खेल खेल रहा है। छापे मारता है, गड़बड़ी मिलने पर नोटिस भेजता है, मगर कार्रवाई के नाम पर है शून्य। कितनी पैथोलॉजी लैब पर कार्रवाई की गई, इसका रिकार्ड भी विभाग के पास नहीं है।
नियमों की अनदेखी कर संचालित की जा रही पैथोलॉजी लैब की जानकारी जिला प्रशासन को भी है। यही वजह है कि डीएम आलोक कुमार पांडेय ने अवैध रूप से संचालित तथा नियमों का पालन नहीं करने वाली लैब पर कार्रवाई के लिए सीएमएस डॉक्टर एसके वार्ष्णेय को जिम्मेदारी सौंपी। सीएमएस ने आठ चिकित्सकों की टीम लेकर दस जनवरी को चार पैथोलॉजी लैब पर छापेमारी की थी। चारों में से किसी भी लैब पर पैथोलॉजिस्ट नहीं मिला था। एक लैब पर लैब असिस्टेंट रिपोर्ट तैयार करता मिला था। एक पर थाइराइड और प्लेटलेट्स काउंट की रिपोर्ट मिली थीं, जबकि उक्त जांच की मशीनें नहीं थीं। एक लैब मुजफ्फरनगर के मेडिकल कॉलेज में तैनात पैथोलॉजिस्ट के नाम से संचालित मिली थी। हैरान करने वाली बात यह है कि इससे पहले भी विभागीय अधिकारी लैबों पर छापेमारी करते रहे हैं। खामियां भी मिलती रही हैं। मगर विभाग की कार्रवाई केवल नोटिस भेजने तक की रही है। यही वजह है कि लैब संचालकों की मनमानी कम होने की बजाय और बढ़ती गई।
विभाग को नहीं पता जिले में कितनी हैं लैब
पैथोलॉजी लैब खोलने के लिए चिकित्सा विभाग में पंजीकरण कराना अनिवार्य है। हैरान करने वाली बात यह है कि विभाग के पास वर्तमान में लैब की सही संख्या नहीं पता है। पिछले दो साल में कितनी नई लैब खुली इसकी कोई जानकारी विभाग के पास नहीं है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि दो साल पहले तक जिले भर में करीब 75 लैब पंजीकृत थीं, जिनमें से 55 शहर और शेष देहात क्षेत्रों में थीं। इसके अलावा विभाग के पास ऐसा भी कोई आंकड़ा नहीं है कि कब-कब लैब पर छापेमारी की गई और कितनी लैब पर कार्रवाई हुई। इससे साफ पता चलता है कि लैब को लेकर विभाग कितना गंभीर है।
मैंने कुछ महीने पहले ही नोडल अधिकारी का चार्ज संभाला है। जब से नोडल अधिकारी हूं लगातार लैब पर छापेमारी की जा रही है। जहां कमियां मिली हैं वहां नोटिस भेजकर सुधार कराए गए हैं। साथ ही कर्मचारियों को भी लैब के आंकड़े दुरुस्त करने के लिए कहा जा चुका है। -- डॉक्टर एके त्रिपाठी, नोडल अधिकारी।
चार पैथोलॉजी लैब पर कुछ दिन पहले ही छापा मारा था। खामियां मिलने पर चारों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया था। नियमों का पालन नहीं करने वाले और अपंजीकृत लैब संचालकों के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी -- डॉ. एसके वार्ष्णेय, सीएमएस।
एक पैथोलॉजी लैब संचालक ने लाइसेंस सरेंडर किया
सहारनपुर। डीएम के निर्देश पर गत दस जनवरी को चार पैथोलॉजी लैब पर की गई छापेमारी का परिणाम यह रहा है कि एक लैब संचालक ने लाइसेंस सरेंडर कर दिया है। नोडल अधिकारी डॉक्टर एके त्रिपाठी ने बताया कि छापेमारी के दौरान पंवार पैथोलॉजी लैब में खामियां मिली थीं। लैब संचालक को नोटिस जारी किया गया था। लैब संचालक ने नोटिस का जवाब देने की बजाय विभाग के सामने लाइसेंस सरेंडर कर दिया है। संचालक ने कहा कि उनके पैथोलॉजिस्ट बराबर समय नहीं दे पा रहे हैं, जिस वजह से शर्तों का पालन कर पाना संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में वह लैब को आगे संचालित करना नहीं चाहते हैं।