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नशे का दंश झेल चुका है सहारनपुर

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सहारनपुर। आज अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस है। नशा जिंदगी पर भारी पड़ता है, जिसे समझना चाहिए, लेकिन लोग समझने को तैयार नहीं हैं। तभी तो जिले में नशे के अवैध कारोबार की जड़े गहरीं हो रही हैं। यह हाल तो तब है, जबकि सहारनपुर जिला नशे का कहर झेल चुका है। बावजूद इसके शराब की भट्ठियां चल रहीं हैं। चरस एवं स्मैक की तस्करी जमकर हो रही है।
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अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस पर नशे से दूर रहने की अपील की जा रही है। सहारनपुर नशे का भयावह रूप देख चुका है। एक बार नहीं बल्कि दो बार नशे ने सहारनपुर में कहर बरपाया है। वर्ष 2010 में देवबंद में जहरीली शराब पीने से 36 लोगों की मौत हुई थी, लेकिन इस साल तो जहरीली शराब ने न सिर्फ देवबंद को बल्कि पूरे जिले को प्रभावित कर दिया। आठ फरवरी 2019 के दिन उमाही कला से मौतों का सिलसिला शुरू हुआ तो एक के बाद एक करके डेढ़ दर्जन गांवों तक पहुंच गया। पुंडैन, शबतपुर, ताजपुरा, कोलकी कला, खेड़ा मुगल समेत कई गांवों के श्मशान में शवों के ढेर लग गए। जिले भर में 80 से अधिक लोगों की मौत हो गई, लेकिन इन मौतों के बावजूद न तो शराब बनाने का सिलसिला थमा और न ही जिले में नशीले पदार्थों की तस्करी ही रुक सकी। तीन राज्यों की सीमा पर स्थित सहारनपुर में उत्तराखंड, हरियाणा एवं हिमाचल प्रदेश से नशीले पदार्थों का जमकर आवागमन हो रहा है। हरियाणा से शराब की तस्करी जमकर हो रही है। गांव-गांव शराब बनाई जा रही है। इस कार्य में पुरुषों के साथ महिलाएं भी जुटी हुईं हैं। तीन दिन पूर्व देवबंद के दो गांवों से पुलिस ने शराब बनाते हुए सात महिलाओं को गिरफ्तार किया था। उनसे 65 लीटर कच्ची शराब बरामद की गई थी, जबकि पांच हजार से अधिक लीटर शराब बनाने के लिए पर्याप्त लहन बरामद किया गया था। सहारनपुर में चरस, डोडा, स्मैक समेत नशीले पदार्थों की सप्लाई भी जमकर हो रही है। सहारनपुर रेलवे स्टेशन के आसपास नशे का कारोबार धड़ल्ले से हो रहा है। महिलाएं भी नशीले पदार्थ की बिक्री में संलिप्त हैं। सदर कोतवाली पुलिस ने स्टेशन के निकट से तीन महिलाओं को भी गिरफ्तार किया था।

- स्टेशन के आसपास सूखे नशे की चपेट में युवा
सहारनपुर शहर में जीपीओ रोड पर और रेलवे स्टेशन के आसपास बड़ी संख्या में युवा सूखा नशा करते हैं। कोई पेट्रोल, तो कोई सुलेशन सहित विभिन्न प्रकार के केमिकल का इस्तेमाल कर नशे का आदि हो रहा है। ऐसे युवाओं को जागरूक करने और नशे की लत छुड़ाने के लिए प्रशासन की तरफ से कोई कारगर प्रयास नहीं हुआ।
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