बिहारीगढ़। 12 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे लोकार्पण के महज तीन माह बाद ही मरम्मत की जरूरत पड़ने से सवालों के घेरे में आ गया है। फ्लाईओवर के नीचे कई हिस्सों में एपॉक्सी ग्राउटिंग का काम चल रहा है। इससे पहले बिहारीगढ़ फ्लाईओवर की दीवार में आई दरार पर एंकर प्लेटें लगानी पड़ी थीं। एनएचएआई इसे बरसात के दौरान नमी रोकने और पुल की दीर्घायु सुनिश्चित करने के लिए एहतियाती कदम बता रहा है, लेकिन इतनी जल्दी शुरू हुए मरम्मत कार्य ने निर्माण गुणवत्ता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
यूं तो जनवरी से एलिवेटेड रोड पर वाहन फर्राटा भर रहे हैं। 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक भव्य समारोह में इसका विधिवत लोकार्पण किया था। लोकार्पण के एक माह बाद ही बिहारीगढ़ फ्लाईओवर की दीवार दरकने लगी थी, जिसे एंकर प्लेट्स लगाकर रोका गया था। अब एलिवेटेड सेक्शन के नीचे एपॉक्सी ग्राउटिंग का काम जारी है। इसे लेकर स्थानीय लोगों के साथ-साथ परियोजना से जुड़े जानकारों के बीच भी इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर कुछ कर्मचारियों का दावा है कि एलिवेटेड स्ट्रक्चर के कुछ हिस्सों में तकनीकी कमियों को दूर करने के लिए एपॉक्सी ग्राउटिंग कराई जा रही है। उनका कहना है कि निरीक्षण के दौरान कुछ स्थानों पर सुधार की आवश्यकता सामने आई, जिसके बाद यह कार्य शुरू कराया गया। पहले गणेशपुर से डाट काली मंदिर तक ग्राउटिंग कराई गई, जबकि अब अमानतगढ़ से बिहारीगढ़ तक भी यह काम जारी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि निर्माण कार्य पूरी तरह गुणवत्ता मानकों के अनुरूप था, तो लोकार्पण के तीन माह के अंदर ही इतने बड़े क्षेत्र में सुधारात्मक कार्य की जरूरत क्यों पड़ी है।
यह होती है एपॉक्सी ग्राउटिंग
फ्लाईओवर में एपॉक्सी ग्राउटिंग एक विशेष प्रकार की मरम्मत तकनीक है, जिसका उपयोग कंक्रीट के ढांचों (पुलों और खंभों) में आई दरारें भरने और उन्हें अंदर से मजबूत करने के लिए किया जाता है। इसमें उच्च क्षमता वाले एपॉक्सी रेजिन और हार्डनर के तरल मिश्रण को दरारों के अंदर दबाव के साथ डाला जाता है।
एक्सप्रेसवे के निर्माण की गुणवत्ता में कोई कमी नहीं है। बरसात के मौसम में कई बार पुल के नीचे से नमी पहुंच जाती है, जहां-जहां से नमी दिखाई दे रही है उसे अंदर जाने से रोकने के लिए एपॉक्सी ग्राउटिंग कराई जा रही है ताकि पुल में इस्तेमाल किए गए स्टील को जंग न लगे। इसका उद्देश्य केवल अतिरिक्त सावधानी बरतकर पुल को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखना है। - रजनीश कुमार कंसल्टेंट एनएचएआई