बड़गांव (सहारनपुर)। रामपुर मनिहारन तहसील क्षेत्र के गांवों में तालाबों में व्याप्त गंदगी और उन पर हो रहे अवैध कब्जों के चलते इनका अस्तित्व खतरे में है। इसके कारण जलस्तर भी नीचे चला गया तथा दूषित पेयजल पीने से लोग बीमारियों की जद में आ रहे हैं।
भले ही केंद्र और प्रदेश की सरकारें पर्यावरण संरक्षण व नदियों-तालाबों को साफ करने की योजनाओं के धरातल पर उतरने के दावे कर रही हो, लेकिन सच्चाई इसके उलट है। ज्यादातर गांवों में तालाबों में कूड़ा डल रहा है। कूडे़ से तालाब के पट जाने पर इस पर कब्जे हो रहे हैं। तालाब निरंतर सिमट रहे हैं जिस कारण जलस्तर भी नीचे जा रहा है।
गांव के तालाबों को कब्जा मुक्त कराना तो दूर की बात है, जो बचे हैं उनकी खुदाई और साफ सफाई भी नहीं हो पा रही है। रामपुर मनिहारन तहसील में 187 गांवों में तहसील रिकार्ड के अनुसार 143 गांव में ही 912 तालाब हैं। लेकिन इनमें से ज्यादातर बदहाल है।
बड़गांव में पहले पांच तालाब हुआ करते थे, लेकिन अब मात्र एक ही तालाब बचा है। इस पर भी ग्रामीण अवैध कब्जा करते जा रहे हैं। यही हाल क्षेत्र के दल्हेड़ी, खुदाबक्सपुर माजरा, बडू़ली नयागांव, अंबेहटाचांद, भगवानपुर, महेशपुर, शिमलाना, जड़ौदापांड़ा, मौरा, झबीरन, ऊमरी मजबता, सिरसली सहित अनेकों गांव का है।
ग्रामीण यशपाल सिंह, बीरपाल सिंह, सुरेंद्र सिंह, मोतीराम, विनोद कुमार आदि का कहना है कि गांव गांव में हो रहे जलवायु परिवर्तन और गिरते जलस्तर को बचाने के लिए पहले सरकार ने मनरेगा योजना के तहत गांव के तालाबों में पानी संचय करने के लिए खुदाई व कायाकल्प का कार्य शुरू कराया था लेकिन अब वह कार्य भी केवल कागजों में ही सिमटकर रह गया है।
उपजिलाधिकारी रामपुर मनिहारन संगीता का कहना है तालाबों पर अवैध कब्जों का मामला गंभीर है। जहां जहां पर अवैध कब्जे किए जा रहे हैं, वहां टीमें बनाकर शीघ्र अवैध कब्जा मुक्त कराते हुए तालाबों को साफ स्वच्छ कराया जाएगा।