बजट में केवल आंकडे़बाजी दी गई है। इससे किसान को कोई राहत होती नहीं दिख रही है। बजट से पहले ही चीनी के दाम गिर गए हैं जिसका सीधा असर किसानों के गन्ना भुगतान पर पड़ेगा। इससे किसानों को बेटियों तक के हाथ पीले करने में दिक्कत आएगी। सरकार ने बजट में खाद की सब्सिडी सीधे किसान के खाते में देने का प्रावधान रखा है जिस तरह रसोई गैस की सब्सिडी आधों को नहीं मिल रही है उसी तरह किसान भी इससे वंचित रह जाएगा। बजट में किसानों के लिए कोई राहत नहीं दिख रही है।
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नीरज चौधरी जिला अध्यक्ष भाकियू अंबावत
भाजपा सरकार ने अपने आखिरी बजट में भी किसानों को उनकी आय 2022 तक दुगुनी करने का लोकलुभावन वादा किया है। इससे किसानों को कोई फायदा होना वाला नहीं है। किसानों को उम्मीद थी कि भाजपा सरकार किसानों के संपूर्ण कर्ज माफ करने की घोषणा कर सकती है, लेकिन भाजपा ने महामहिम राष्ट्रपति जी का वेतन पांच लाख रुपये कर दिया है और किसानों को बेवकूफ बनाने का काम किया है। किसान को ऋण नहीं फसलों का लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए। ऋण के कारण ही किसान आत्महत्या कर रहे हैं। सरकार ने नई मंडियों के लिये खोलने व किसानों की पूर्ण फसल खरीद की खरीद की कोई गारंटी नहीं ली। किसानों डीजल पर छूट देनी चाहिये थी। कृषि शोध केन्द्र व किसानों को तकनीकी जानकारी के लिए सरकार ने कोई पहल नहीं की। इस बजट से किसान को कोई लाभ होने वाला नहीं। किसान और ज्यादा कर्ज के बोझ से दबेगा।
श्यामवीर त्यागी
उप्र गन्ना प्रकोष्ठ संयोजक भारतीय किसान संघ
भाजपा सरकार यदि बजट को सही तरीके से लागू करें तो यह किसान के लिए मददगार साबित हो सकता है। आजादी से लेकर आज तक किसान अपनी मांगों को मांग रहा था जो आज इस बजट से पूरी होती दिख रही है।