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बेहट विधान सभा सीट नंबर एक

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बेहट (सहारनपुर)। सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद बेहट विधानसभा क्षेत्र के घाड़ इलाके के लोगों को उम्मीद जगी थी कि सरकार उनकी समस्याओं को प्राथमिकता पर लेगी, लेकिन सरकार का एक साल पूरा होने पर भी कोई काम शुरू नहीं होने पर घाड़वासियों की उम्मीद फिर से टूटने लगी है। उनका कहना है कि हर बार चुनावी समय में वादे तो बहुत होते है, लेकिन सब हवा हवाई रह जाता है। लोग यहां के कायाकल्प की बाट ही जोह रहे हैं।
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बेहट विधानसभा क्षेत्र की प्रमुख समस्याएं
फल पट्टी क्षेत्र घोषित होने से यहां उद्योग धंधों की स्थापना नहीं हो रही जबकि आम कारोबार भी पिछले एक दशक से घाटे का सौदा हो रहा है। लोग लगातार फल पट्टी को निरस्त कर औद्योगिक इकाइयों की स्थापना किए जाने की मांग उठा रहे हैं। घाड़ इलाके में दर्जनों गांवों ऐसे है, जो बरसाती नदियों से घिरे है। नदियों में बाढ़ आने पर उनका बाहरी दुनियां से संपर्क कट जाता है। ग्रामीण लगातार नदियों पर पुलों के निर्माण की मांग कर रहे है। चुनाव बहिष्कार तक किए गए। लेकिन समस्या का समाधान आज तक नहीं किया जा सका। बरसाती नदियों में बाढ़ आने पर हर साल तेज बहाव पानी से किसानों की हजारों बीघा भूमि नदियों में मिल जाती है। बचाव के लिए तटबंधों के निर्माण की मांग लगातार की जा रही है। लेकिन समस्या का समाधन नहीं हुआ। अग्निकांडों से होने वाले नुकसान से बचाव के लिए फायर स्टेशन की स्थापना नहीं हो सकी है।
एक साल के कार्यकाल में उन्होंने विधायक निधि से विधानसभा क्षेत्र में सीसी सड़कों का निर्माण कराया। पेयजल समस्या के निदान के हैंडपंप लगवाये जा रहे हैं। निधि के अलावा सरकार की तरफ से किसी तरह की कोई योजना नहीं मिल पाई और न ही किसी अन्य काम के लिए कोई बजट मिला, जबकि घाड़ क्षेत्र में होने वाले अग्निकांडों से होने नुकसान की रोकथाम के लिए फायर स्टेशन, नदी नालों से घिरे गांवों के लिए नदियों पर पुलों के निर्माण, बरसात में नदियों से होने वाले भूमि कटाव को रोकने के लिये 40 गांवों में तटबंधों के निर्माण और सिद्धपीठ शाकंभरी को पर्यटन स्थल बनाये जाने के लिये आवाज उठा चुके है, लेकिन सरकार की तरफ किसी काम के लिये कोई शुरुआत नहीं हो सकी।
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नरेश सैनी
विधायक बेहट विधानसभा क्षेत्र

एक साल के कार्यकाल के दौरान विधायक विफल साबित हुए हैं। क्षेत्र की समस्याओं को भी वे विधान सभा में मजबूती के साथ नहीं उठा पाए जिसके चलते उनका निराकरण नहीं हो सका। विधायक के तौर पर कोई उपलब्धि कांग्रेसी विधायक के खाते में नहीं है।
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महावीर सिंह राणा
पूर्व विधायक एवं गत विधान सभा चुनाव में प्रमुख प्रतिद्वंदी
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