सहारनपुर। शासन से 10 करोड़ रुपये का बजट मिलने के छह महीने बाद भी ढमोला नदी की सफाई और मरम्मत का काम फाइलों से बाहर नहीं निकल सका। पहले कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस ने हाथ खड़े किए, फिर सिंचाई विभाग ने भी संसाधनों का अभाव बताकर जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया।
नतीजा यह कि हर बरसात में बाढ़ झेलने वाली शहर की करीब एक दर्जन कॉलोनियां इस बार भी खतरे के साये में हैं। जिम्मेदार विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालते रहे, जबकि नदी में सिल्ट और कचरा जस का तस पड़ा है।
बीते वर्षों में भारी बारिश के कारण ढमोला नदी उफान पर आती रही है। इससे करीब 10-12 तटीय कॉलोनियों में पानी भर जाने से बाढ़ की स्थिति बन जाती है। घरों में पानी भरने के कारण लोगों को जान और माल का नुकसान तक हो चुका है। शहर की इन कॉलोनियों और वहां बसे नागरिकों को बाढ़ से बचाने के लिए जनप्रतिनिधियों के द्वारा शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था, जिसे शासन से मंजूरी मिलने के साथ ही छह महीने पहले दस करोड़ रुपये का बजट भी जारी हो चुका है। नदी पर काम के लिए शासन ने सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज) को कार्यदायी संस्था नामित किया था।
काम बरसात से पहले होना था, जिससे कि बरसात में बाढ़ की समस्या की पुनरावृत्ति न हो, लेकिन जब सीएंडडीएस के अधिकारियों को पता चला कि काम निर्माण की बजाय नदी की सिल्ट और कचरा सफाई का है तो उसके अधिकारियों ने शासन को पत्र लिखकर काम करने से मना कर दिया।
अधिकारियों का कहना था कि यह कार्य उनकी प्रकृति का नहीं है न ही इससे पहले ऐसा कोई कार्य किया है। यदि कार्य निर्माण संबंधी होता तो वह जरूर करते। इसके बाद शासन ने सिंचाई विभाग को नामित किया। नगर निगम सिंचाई विभाग को कई बार पत्र लिखकर काम शुरू करने को कहा चुका है, लेकिन पता चला है कि सिंचाई विभाग ने भी काम करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे में कार्य लटकता जा रहा है। संवाद