विकास प्राधिकरण और निजी विकासकर्ताओं से सस्ते में छोटे मकान लेकर उसे बेच पाना अब आसान नहीं होगा।
राज्य सरकार ऐसी नीति बनाने जा रही है कि इन मकानों को आवंटियों को कम से कम पांच साल अपने पास रखना होगा।
इन मकानों ईडब्ल्यूएस की कीमत 3 लाख और एलआईजी की 7 लाख रुपये फिक्स करने की योजना है। यही नहीं इन मकानों का आवंटन और उस पर कब्जा भी तय अवधि में दी जाएगी।
आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर लिया है। शीघ्र ही मंजूरी के लिए कैबिनेट के पास भेजा जाएगा।
प्रदेश में गरीबों व अल्प आय वर्ग के लिए विकास प्राधिकरण, आवास विकास परिषद और हाईटेक टाउनशिप में ईडब्ल्यूएस व एलआईजी मकान बनाना अनिवार्य है।
इन मकानों के आवंटन के लिए आय सीमा भी निर्धारित है। ये मकान बाजार से कम कीमत पर बनाकर पात्रों को आवंटित किए जाने की व्यवस्था है।
पर होता यह है कि ईडब्ल्यूएस व एलआईजी मकानों को प्रापर्टी डीलर विकास प्राधिकरण व आवास विकास परिषद के अधिकारियों से साठगांठ कर छद्म नामों से आवंटित कर लेते हैं और बाजार में कीमत चढ़ने पर मुंहमांगी कीमत पर इसे बेच देते हैं।
इसके चलते गरीब की रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों और अल्प आय वर्ग के लोगों को मकान नहीं मिल पा रहे हैं।
इसलिए ईडब्ल्यूएस व एलआईजी मकानों की कीमत नए सिरे से तय करने के साथ यह प्रावधान किया जा रहा है कि इन मकानों को लाभार्थी पांच साल तक न तो बेच और न ही किसी दूसरे के नाम पर ट्रांसफर कर सके।
मकानों को ट्रांसफर करने का अधिकार केवल ब्लड रिलेशन को ही होगा। मकानों को यह पांच साल बाद लाभार्थी बेचना चाहेगा, तो उसे इसके लिए स्पष्ट कारण बताना होगा। इन मकानों का कोई भी आवंटी यदि शर्तों का उल्लंघन करेगा तो उसका आवंटन रद्द करने की व्यवस्था होगी।
मकान न बनाया तो शेल्टर फीस
हाईटेक टाउनशिप में ईडब्ल्यूएस और एलआईजी मकान बनाना अनिवार्य होगा। विकास प्राधिकरण और निजी क्षेत्र में विकसित होने वाली कॉलोनियों में 10 फीसदी ईडब्ल्यूएस और 10 फीसदी एलआईजी मकान या भूखंड विकसित कर कमजोरों को आवंटित करना अनिवार्य है।
विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद तो कमजोर वर्ग के लिए मकान बनाकर आवंटित कर रहे हैं, लेकिन सभी निजी विकासकर्ता इसका पालन नहीं कर हैं। इसलिए निजी विकासकर्ता यदि इस नियम का पालन नहीं करते हैं, तो उने शेल्टर फीस ली जाएगी।