रामपुर। जिले में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का एक और मामला सामने आया है। सांस की बीमारी से पीड़ित महिला की हालत बिगड़ने पर पहले स्वार सीएचसी ले जाया गया, जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल में इलाज के दौरान बृहस्पतिवार रात महिला की मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया।
परिजनों ने आरोप लगाया कि डॉक्टर और स्टाफ ने समय पर इलाज नहीं किया और चाय पीते रहे। महिला के पति ने शव ले जाने से मना कर दिया। अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने महिला का शव सुबह करीब 10 बजे उसके घर पहुंचाया। बाद में महिला का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
अजीमनगर थाना क्षेत्र के भोट बक्काल गांव निवासी 40 वर्षीय चंद्रावती को सांस लेने में दिक्कत हुई थी। मृतका के पति सत्यप्रकाश ने बताया कि पहले पत्नी को स्वार सीएचसी ले जाया गया, जहां से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। उनका आरोप है कि बृहस्पतिवार रात करीब दो बजे से पत्नी तड़प रही थी। कई बार डॉक्टर को बुलाने के बावजूद कोई इलाज के लिए नहीं पहुंचा। वार्ड में मौजूद डॉक्टर और स्टाफ चाय पीते रहे, जिससे उनकी पत्नी की मौत हो गई।
मौत के बाद परिजनों ने हंगामा किया और पति ने शव उठाने से इनकार कर दिया। सुबह परिजन घर चले गए। अस्पताल प्रशासन ने शव को मोर्चरी में रखवाकर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने परिजनों को समझाया, जिसके बाद वे दोबारा पहुंचे। इसके बाद पुलिस ने एंबुलेंस से शव घर भिजवाया।
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इलाज को लेकर रातभर भटके परिजन
रामपुर। परिजनों का कहना है कि चंद्रावती को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था लेकिन समय पर उपचार नहीं मिला। आरोप है कि कई बार डॉक्टर और स्टाफ को बुलाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। महिला दर्द से कराहती रही और परिजन इधर-उधर भटकते रहे। समय पर इलाज न मिलने से उसकी हालत बिगड़ती गई और अंततः उसकी मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। संवाद
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महिला को गंभीर हालत में लाया गया था। प्राथमिक उपचार के बाद उसे हायर सेंटर रेफर किया गया लेकिन परिजन उसे लेकर नहीं गए। कुछ समय बाद महिला की मौत हो गई। अस्पताल स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही नहीं हुई है। -डॉ. बीसी सक्सेना, सीएमएस
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वेंटिलेटर सुविधा होती तो बच सकती थी महिला की जान
रामपुर। जिला अस्पताल में वेंटिलेटर सुविधा न होने का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। परिजनों का कहना है कि यदि अस्पताल में वेंटिलेटर उपलब्ध होता तो महिला की जान बचाई जा सकती थी। सांस की तकलीफ से जूझ रही चंद्रावती को तत्काल बेहतर सपोर्ट की जरूरत थी लेकिन संसाधनों की कमी के कारण स्थिति संभाली नहीं जा सकी। इस घटना ने एक बार फिर जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए। संवाद