जेआर अस्पताल में मरीजों की से खिलवाड़ किया जा रहा था। न तो अस्पताल का और न ही मेडिकल स्टोर का लाइसेंस था। यानि बिना किसी लाइसेंस के ही अस्पताल चलाया जा रहा था। इसका खुलासा होने के बाद फर्जी तरीके से मेडिकल चलाने पर मेडिकल संचालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की कवायद शुरू कर दी गई है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग डाक्टर को बचाने में लगा हुआ है।
शहर में जौहर रोड पर जेआर अस्पताल में डायमंड सिनेमा रोड निवासी हर स्वरूप वर्मा को हालत बिगड़ने पर भर्ती कराया था। अस्पताल का कोई लाइसेंस नहीं है फिर भी उन्हें भर्ती कर लिया गया और बोतल चढ़ानी शुरू कर दी गई। यहां खुले मेडिकल स्टोर से जो दवाएं दी गईं वह एक्सपायर डेट की थीं, जिससे मरीज की हालत बिगड़ गई थी। मामला बिगड़ने पर हंगामा हो गया, जिस पर पुलिस के साथ ही प्रशासनिक अफसर भी मौके पर पहुंच गए। बताया गया कि अस्पताल के भीतर स्थित मेडीकल स्टोर से खरीदी गई दवा इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल की गई, लेकिन जो दवा दी गई वह एक्सपायर निकली। इसका खुलासा हालत बिगड़ने पर हुआ।
मामले का खुलासा होने के बाद हड़कंप मच गया। आनन-फानन में इस पूरे मामले की जांच सिटी मजिस्ट्रेट को सौंप दी गई। सिटीमजिस्ट्रेट ने मौके पर पहुंचकर मुआयना किया साथ ही तत्काल प्रभाव से मेडिकल स्टोर को सीज करा दिया। साथ ही औषधि निरीक्षक को भी इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए। शनिवार को औषधि निरीक्षक की ओर से मेडिकल स्टोर को चेक किया गया तो पाया गया कि मेडिकल स्टोर बिना लाइसेंस के ही चल रहा था। यानि कुल मिलाकर वह कोई लाइसेंस नहीं दिखा पाया, जिसके बाद औषधि निरीक्षक की टीम ने मेडिकल स्टोर में मिली करीब डेढ़ लाख रुपये की दवाओं को सील कर दिया, यह एक्सपायरी डेट की थीं। इसके साथ ही यहां से दो दवाओं के सैंपल भी भरे गए।
औषधि निरीक्षक ने इस संबंध में बगरौवा गांव निवासी मेडिकल संचालक नवेद हुसैन के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में तहरीर दी है। औषधि निरीक्षक ने मेडिकल संचालक के खिलाफ तो तहरीर दी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले से अंजान बना रहा। स्वास्थ्य विभाग को तो इसकी जानकारी ही नहीं थी। सीएमओ का कहना था कि विभाग की ओर से जेआर अस्पताल को लाइसेंस ही नहीं जारी किया गया है। यानि कुल मिलाकर अस्पताल भी पूरी तरह से फर्जी माना जा रहा है, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।