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किसी के जख्म पर चाहत से पट्टी कौन बांधेगा, अगर बहने नहीं होंगी तो राखी कौन बांधेगा

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रामपुर। किसी के जख्म पर चाहत से पट्टी कौन बांधेगा, अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बांधेगा। शायर मुनव्वर राणा के इस शेर ने राजकीय रजा डिग्री कॉलेज में हुए आल इंडिया तमसीली मुशायरे में श्रोताओं की वाहवाही बाटोरी। तमसीली मुशायरे में छात्र-छात्राओं ने देश के नामचीन शायरों के कलाम पेशकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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उर्दू विभाग की ओर से मंगलवार को हुए मुशायरे का उद्घाटन मुख्य विकास अधिकारी गजल भारद्वाज ने किया। सीडीओ ने कहा कि इस तरह का आयोजन होना वर्तमान समय में बहुत जरूरी है। क्योंकि ज्यादातर लोग फोन और इंटरनेट की दुनिया में खो कर शिक्षा एवं संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे आयोजन से हमें प्रख्यात कवियों और शायरों को जानने का मौका मिलता है। विद्यार्थी इंतजाम उल हक ने मंजर भोपाली, मोहम्मद यासीन ने राही बस्तवी, हबीबा फिरोज ने अंजुम रहबर, अब्दुल समद ने वसीम बरेलवी, मुशीर उल हक ने मुनव्वर राना, अली जमीर ने अजहर इनायती, रऊफ अहमद ने ताहिर फराज, इंतखाब ने केके सिंह मयंक, मेहरान अहमद ने नवाज देवबंदी, अरसलान शम्सी ने सज्जाद झंझट, खुशनूद ख्वाजा ने विपुल कुमार, अनस अली रजा ने ताबिश लखनवी, सचिन ने कुमार विश्वास, आसिफा ने शबीना अदीब, निशरा ने निकहत अमरोही, अलवीरा सलीम ने सबा बलरामपुरी, उरूज ने शाइस्ता शान, साहिबा ने तरन्नुम कानपुरी, फ़ैज अहमद ने अल्ताफ जिया, हबीबा फिरोज ने अंजुम रहबर बनकर उनकी गजलें और कलाम पेश कर तालियां और वाहवाही लूटे।
फाएजा जुबैर ने इन सभी को प्रशिक्षण दिया। अंत में प्राचार्य डॉ. पीके वार्ष्णेय ने सभी का आभार जताया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक और छात्र-छात्राओं ने उपस्थित होकर इस कार्यक्रम में सम्मिलित छात्राओं का प्रोत्साहन किया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. सैयद मोहम्मद अरशद रिजवी ने आभार जताया।
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इन गजलों पर मिली दाद
मुनव्वर राना की गजल किसी के जख्म पर चाहत से पट्टी कौन बांधेेगा, अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बांधेगा। अल्ताफ जिया की गजल एक बार उजड़ जाए तो फिर बचना है मुश्किल, यह दिल है मेरा दिल्ली का दरबार नहीं है। ताहिर फराज की गजल बहुत खूबसूरत हो तुम सहित शायरों के मशहूर कलाम और गजलों ने श्रोताओं को तालिया बजाने के लिए मजबूर कर दिया।
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