रामपुर उपमंडल के स्कूलों में कोरोना महामारी को लेकर चल रहीं बंदिशें हटने के बाद स्कूल खुल गए हैं। इससे विद्यार्थी काफी उत्साहित हैं। निचले क्षेत्रों में अब परीक्षाएं भी शुरू हो गई हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई से उन्हें कई प्रकार की परेशानियों से जूझना पड़ रहा था। खासकर कई दुर्गम क्षेत्रों में सिग्नल की दिक्कत के कारण ऑनलाइन पढ़ाई नहीं हो पा रही थी।
इसके अलावा स्कूल प्रबंधन ने भी विद्यार्थियों को तनाव और मानसिक तनाव से बाहर निकालने के लिए खेलकूद और मनोरंजन गतिविधियां शुरू कर दी हैं। इसके अलावा स्कूलों में विद्यार्थियों की लेखन और पठन की क्षमता को विकसित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। स्कूल खुलने के बाद बारहवीं कक्षा की परीक्षा देने के लिए रामपुर में आए विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों ने अपने विचार साझा किए।
बारहवीं कक्षा की छात्रा हिमांशी ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान दो साल तक ऑनलाइन पढ़ाई हुई। इससे विद्यार्थियों को कई प्रकार की दिक्कतें पेश आईं। लगातार मोबाइल चलाने से उंगलियों और सिर में दर्द बढ़ने लगा था। इसके अलावा कई अन्य परेशानियों से भी जूझना पड़ रहा था। अब स्कूल खुलने से विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिली है।
बारहवीं कक्षा छात्रा निताशा ने बताया कि पिछले दो सालों से कोरोना संक्रमण के कारण स्कूल बंद थे। इस वजह से विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई हो रही थी। नियमित कक्षाएं नहीं चलने से बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह से प्रभावित हो रही थी। अब नई व्यवस्था के तहत स्कूल खुलने से विद्यार्थियों को राहत मिली है। उन्होेंने कहा कि अब पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर परीक्षाओं में अच्छा परिणाम लाने की कोशिश है।
छात्रा आस्था ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई और ऑफलाइन पढ़ाई में काफी अंतर है। ऑफलाइन पढ़ाई से ही शिक्षा का नींव मजबूत होती है। कक्षा में अपने सहपाठियों के साथ बैठकर पढ़ाई करने में मन लगता है। ऑनलाइन पढ़ाई में यह माहौल नहीं मिल पाता था। स्कूल बंद होने से बच्चों के भविष्य पर भी खतरा मंडरा रहा था।
छात्र राहुल ने बताया कि दो साल तक ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई करना काफी मुश्किल था। कई बार सिग्नल गुल होने से पढ़ाई करने में कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। स्कूल खुलने के बाद नियमित कक्षाएं शुरू होने से विद्यार्थी काफी खुश हैं। स्कूल बंद होने से खेलकूद के प्रति हमारा रुझान कम हो गया था। विद्यार्थियों के लिए सुनहरे भविष्य के लिए स्कूलों में नियमित कक्षाएं ही बेहतर हैं।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पद्म छात्र स्कूल रामपुर के प्रधानाचार्य प्रवीण गुप्ता ने बताया कि पिछले दो सालों से कोविड-19 के कारण स्कूल बंद रहे। ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों में मानसिक दबाव और चिड़चिड़ापन अधिक दिख रहा था, लेकिन ऑफलाइन कक्षाएं शुरू होने से सभी छात्र और छात्राओं में उत्साह का माहौल है। स्कूलों में सुबह के समय प्रार्थना सभाओं का होना भी जरूरी है। स्कूल प्रबंधन ने छात्रों को तनाव दूर करने के लिए रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। उन्होंने छात्रों के परिजनों से अपील की कि बच्चों को समय पर सोने दें और सुबह जल्दी उठने के लिए भी सख्ती न बरतें।