सपा सरकार में रहते आजम खां ने अपनी निजी यूनिवर्सिटी के लिए सरकारी खजाने का मुंह किस तरह खोल दिया एक के बाद एक मामले आते जा रहे हैं। ग्रामीण पेयजल योजना के नाम पर 86.4 लाख रुपये की लागत से गांवों में पेयजल आपूर्ति के लिए बना ओवरहेड टैंक भी जौहर विश्वविद्यालय में पेयजल आपूर्ति कर रहा है। यूनिवर्सिटी के आसपास के गांवों के लोग पेयजल को तरस रहे हैं और हैंडपंपों का इस्तेमाल कर रहे हैं।ओवरहेड टैंक मामले में भी पूर्व मंत्री नवेद मियां ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत कर जांच कराने की मांग उठाई है।
गांव सिंगनखेड़ा और इसके मजरा फतेहगंज, खिरकपुर, आजमगढ़, हशमतगंज, भजनपुर, आलियागंज, अहमदनगर, करामतनगर और शौकतनगर के लिए सरकार से पेयजल योजना बनवाई गई। इसके माध्यम से इन गांवों में पाइप लाइन के जरिए पेयजल आपूर्ति होनी थी। लेकिन सिंगनखेड़ा गांव के नाम से बने इस ओवरहेड टैंक पर 86.4 लाख रुपये सरकार के खर्च हुए, लेकिन यह ओवरहेड टैंक जौहर विश्वविद्यालय में लगा है और विश्वविद्यालय के लिए पेयजलापूर्ति हो रही है। इसे ओवरहेड टैंक को भरने के लिए बिजली का बिल जल निगम भरता है और पानी की सप्लाई विश्वविद्यालय को होती है। जिन गांवों के लिए आपूर्ति होनी चाहिए वहां के लोग एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं।
हैंडपंपों के दूषित पानी को पीने के लिए मजबूर हैं। पूर्व मंत्री नवेद मियां ने इस संबंध में मुख्यमंत्री से शिकायत कर जांच कराने और पेयजल पर खर्च धन और बिजली बिल की रिकवरी कराने की मांग उठाई है, ताकि गांव वालों को शुद्ध पेयजल नसीब हो सके।