मसवासी क्षेत्र में बहल्ला नदी में समाया अस्थाई पुल। संवाद
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स्वार। पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बारिश के कारण बहल्ला नदी पूरे उफान पर है। जिसके चलते नदी पर बना अस्थाई पुल नदी में समा गया है। पुल के नदी में समा जाने से आधा दर्जन गांव के लोगों का तहसील मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। ग्रामीणों को तहसील मुख्यालय पहुंचने के लिए पंद्रह किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ रहा है। जिसके चलते ग्रामीणों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।
उत्तराखंड से आ रही बहल्ला नदी गद्दीनगली गांव से होकर गुजरती है। ग्राम पंचायत गद्दीनगली के अन्य गांव का संपर्क मार्ग गद्दीनगली गांव से ही जुड़ा हुआ है। आधा दर्जन गांव के ग्रामीणों को तहसील मुख्यालय तक जाने के लिए 15 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ता था। बताया जा रहा है की ग्रामीणों ने कई बार जनप्रतिनिधियों से पुल बनवाने की मांग की थी। जनप्रतिनिधियों ने आश्वासन तो दिया किन्तु जमीनी स्तर पर पुल बनवाने की कवायद शुरू नहीं की। जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार हुए ग्रामीणों ने चंदा एकत्र कर लोहे का अस्थाई पुल का निर्माण करा लिया था। लेकिन, पहाड़ पर लगातार हो रही बारिश के चलते नदी उफान पर आ गई है। जिससे अस्थाई पुल नदी में समा गया है। पुल के नदी में समा जाने से ग्रामीणों को फिर से पुरानी चली आ रही समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों की समस्या से स्थानीय प्रशासन भी भली भांति परिचित है। लेकिन, समस्या के समाधान को लेकर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई है। जिसको लेकर ग्रामीणों में जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक अधिकारियों के प्रति भारी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को पत्र भेज स्थाई पुल निर्माण कराए जाने की मांग की है।
कई बार जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक अधिकारियों से स्थाई पुल निर्माण की मांग की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गई। मजबूरी में ग्रामीणों ने चंदे से अस्थाई पुल बना लिया, जो अब डूब गया है।
- शाहनवाज, प्रधानपति
चुनाव के दौरान तो सभी प्रत्याशी बड़े-बड़े वादे तो किए, लेकिन अभी तक पुल निर्माण की कवायद शुरू नहीं की गई। जिसके चलते भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अतिरिक्त सफर तय करना होगा।
- गगनदीप सिंह, ग्रामीण
तहसील मुख्यालय तक जाने के लिए पंद्रह किमी का लंबा सफर तय करना पड़ता है। जिससे काफी समय खराब हो जाता है। इसलिए, ग्रामीणों ने आपस में चंदा एकत्र कर अस्थाई पुल का निर्माण करा लिया था।
- अमरजीत सिंह, ग्रामीण