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सौ वर्ष के इतिहास में पहली बार नहीं हुई परीक्षा

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रामपुर। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद को इस वर्ष सौ वर्ष पूरे हो गए हैं। कोरोना संक्रमण के चलते बोर्ड के इतिहास में ऐसा मौका पहली बार आया है, जब हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट का बगैर परीक्षा कराए ही सभी पंजीकृत परीक्षार्थियों का परिणाम घोषित कर दिया गया।
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माध्यमिक शिक्षा परिषद का गठन 1921 में हुआ था। यह भारत का एक मात्र शिक्षा बोर्ड था। तब से बोर्ड ने 10+2 शिक्षा प्रणाली अपनाई हुई है। यह हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट कक्षा के विद्यार्थियों के लिए सार्वजनिक परीक्षा आयोजित करता है। माध्यमिक शिक्षा परिषद को पहले संयुक्त प्रांत वैधानिक परिषद (यूनाइटेड प्रोविन्स लेजिस्लेटिव काउन्सिल) के एक अधिनियम द्वारा की गई थी। बोर्ड की सबसे पहली परीक्षा 1923 में आयोजित की गई थी। तभी से यह बोर्ड लगातार काम कर रहा है। लेकिन, कोरोना संक्रमण के बाद पहली बार यह मौका आया, जब बोर्ड परीक्षा नहीं हुईं और बच्चों को बिना परीक्षा के ही पास कर दिया गया।
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