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यूक्रेन पर हमला : - 5 डिग्री तापमान में छात्र-छात्राओं की सेहत बिगड़ी

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रामपुर। यूक्रेन में फंसे रामपुर के छात्र-छात्राओं की सेहत दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। माइनस पांच डिग्री सेल्सियस तापमान में छात्र-छात्राएं अब बीमार होने लगे हैं। छात्र-छात्राओं के पास खाने पीने का सामान भी खत्म हो गया है। एक छात्रा शजा सामान लेने के लिए निकली, तभी ब्लास्ट हो गया। दहशत में भागते समय छात्रा के पैर में मोच आ गई। वहीं, एक छात्रा की नाक और मुंह से खून आने लगा। लगातार बमबारी से यूक्रेन में खौफ का माहौल है। ऐसे में परिजनों की चिंताएं अपने बच्चों के प्रति बढ़ती जा रही हैं। परिजनों की केंद्र सरकार से गुहार है कि किसी भी तरह से यूक्रेन में फंसे छात्र-छात्राओं को स्वदेश लाया जाए।
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अठभैयान घेर सैफुद्दीन निवासी शजा उस्मान नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी खारकीव से एमबीबीएस कर रही हैं। इस बार उनका तीसरा साल है। उनकी मां समीना नादिर ने बताया कि सोमवार दोपहर उनकी बेटी से बात हुई थी। शजा ने बताया कि बहुत बुरा हाल है। तापमान काफी कम होने के कारण छात्र-छात्राएं बीमार पड़ने लगे हैं। उन्हें भी बुखार आ गया है। जबकि, उनकी साथी छात्रा उंजिला सैफी की नाक और मुंह से खून आ रहा है।
शजा ने बताया कि दोपहर में कर्फ्यू में ढील मिली थी, तो वह खाने-पीने का सामान लेने के लिए निकली थी, लेकिन इस बीच एक ब्लास्ट हो गया। डर की वजह से वह भागकर वापस हॉस्टल के बेसमेंट में कैद हो गई। इससे उनके पैर में मोच आ गई। समीना नादिर के अनुसार उनकी बेटी ने बताया कि हर तरफ बारूद ही बरस रहा है। लगातार अंतराल पर धमाके हो रहे हैं। ऐसे में बच्चों के बीमार होने से उनके परिजनों की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं। वे दुआ कर रहे हैं। साथ ही भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि सरकार किसी भी तरह से यूक्रेन में फंसे बच्चों को निकाल ले।
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ज्वालानगर के मुदित राजपूत के पिता प्रेम सिंह ने बताया कि चार दिन से मुदित राजपूत अपने साथियों के साथ हॉस्टल के बेसमेंट में ही छिपा हुआ है। सोमवार को थोड़ी देर के लिए हॉस्टल के कमरे में जाने की अनुमति मिली, लेकिन फिर बेसमेंट में बुला लिया गया। बताया कि फिलहाल तो खाने पीने की दिक्कत नहीं है, लेकिन बमबारी बहुत हो रही है। हवा में भी बारूदी गंध समा गई है। मुदित राजपूत नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी खारकीव से एमबीबीएस कर रहे हैं। यह उनका पहला वर्ष है।
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