जिले में 11 फीसद परिषदीय स्कूलों में नहीं है बिजली, बच्चों के माथे से टपकता है पसीना
रामपुर। आजादी के 75 साल बाद भी जिले के परिषदीय स्कूल मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। स्थिति यह है कि अब भी 11.38 फीसद स्कूलों में बिजली का कनेक्शन तक नहीं हैं। हालांकि, स्कूलों में अंडरग्राउंड बिजली फिटिंग से लेकर पंखे तक टांग दिए गए हैं, लेकिन इन पंखों को चलाने के लिए बिजली का इंतजार है। ऐसे में गर्मी में बच्चे बिना पंखे के ही पढ़ने को मजबूर हैं, तो शिक्षक पढ़ाने को मजबूर हैं।
जिले में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से 1599 परिषदीय स्कूलों का संचालन किया जाता है। इनमें 626 उच्च प्राथमिक विद्यालय और 973 प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। आजादी के 75 साल बाद भी स्कूलों की दशा पूरी तरह से नहीं सुधारी जा सकी है। हालांकि, सरकारों की ओर से स्कूलों की दशा बेहतर करने के लिए तमाम प्रयास किए जाते रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी तमाम स्कूल ऐसे हैं, जहां भवनों का अभाव है। जबकि, तमाम स्कूलों में फर्नीचर तक नहीं हैं। अब बिजली के लिहाज से ही देखा जाए तो रामपुर में 182 परिषदीय स्कूल ऐसे हैं, जहां बिजली के कनेक्शन तक नहीं हैं। जिले के 11.38 फीसद विद्यालय बिजली विहीन हैं। जहां न तो स्कूलों में पंखे चलते हैं और न ही अंधेरा होने पर बल्ब जलते हैं। अधिकांश स्कूलों में पंखे और बल्ब लगे जरूर हैं, लेकिन वो सिर्फ शोपीस बने हुए हैं। वहीं, इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। जिले में 42 से 44 डिग्री तक तापमान पहुंच रहा है। ऐसे हालात में बच्चे तपती धूप से गर्म हो रहे लिंटर के नीचे बैठकर शिक्षा हासिल करने को मजबूर हैं। बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों की हालत भी काफी खराब रहती है। गर्मी में बेहाल शिक्षक पसीने में भीगे रहते हैं, लेकिन इसके बाद शिक्षकों और बच्चों की दिक्कतें दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
बिजली कनेक्शन न होने का ये हैं कारण
1- जिले के परिषदीय स्कूलों में बिजली का कनेक्शन न होने के कई कारण हैं, लेकिन इसमें सबसे अहम बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन करते समय जिन बिंदुओं की जानकारी ली जाती है, उसको लेकर शिक्षकों में संशय है। क्योंकि आवेदन के समय शिक्षकों से उनके आधार कार्ड, पैनकार्ड और फोटो मांगे जाते हैं, जो शिक्षक इसलिए देना नहीं चाहते कि कहीं उनकी कोई आर्थिक जवाबदेही न बन जाए। इसका कारण यह है कि विभाग की ओर से बिजली के बिल का भुगतान करने के कोई मद तय नहीं है, जिससे शिक्षकों का यह भ्रम दूर हो सके।
2- बिजली निगम के स्तर पर विद्यालयों के कनेक्शन में कोई रुचि नहीं दिखाई जाती। एक शिक्षक बताते हैं कि उन्होंने खुद तीन बिजली निगम के अवर अभियंता से संपर्क किया। बिजलीघर गए, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में हर बार शिक्षण कार्य छोड़कर बिजली दफ्तरों के चक्कर काटना संभव नहीं है।
3- जिले में तमाम विद्यालय ऐसे हैं, जिनसे बिजली के खंभे की दूूूरी 40 मीटर से अधिक है। नियमानुसार विद्युत निगम को इससे अधिक दूूरी पर बिजली कनेक्शन देने के लिए अलग से लाइन बनानी पड़ेगी, जिसका खर्च उपभोक्ता को उठाना होगा। ऐसे 66 विद्यालय तो अब तक सामने आ गए हैं। हालांकि, बीएसए ने विद्युत निगम को एस्टीमेट बनाकर भेजने को कह दिया है।
-वर्ष 2018 में हमारे विभाग की ओर से बिजली कनेक्शन देेने के लिए विद्युत निगम को धन दिया गया, लेकिन आवेदन में तमाम दिक्कतें आ रहीं थीं। कई चक्कर भी लगाए, लेकिन न तो जेई सुनने को तैयार हैं और न ही विभाग के उच्चाधिकारी। ऐसे में बिजली का कनेक्शन नहीं हो सका। हालांकि, स्कूल में बिजली की फिटिंग, पंखे, बल्ब आदि लगा दिए गए हैं।
-नरेश कुमार, प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय मनुनागर
-हम तो अपने विद्यालय में बिजली का कनेक्शन कराने के लिए अपने पास से भी रुपये जमा करने को तैयार थे, लेकिन विद्युत निगम अफसरों से कई बार कहने के बाद भी कनेक्शन जारी नहीं किया गया। हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर टाल दिया जाता था। इसके बाद हमने कनेक्शन के लिए निजी स्तर आवेदन भी कर दिया, लेकिन एक साल बाद भी कनेक्शन जारी नहीं हुआ। कमियां निकाली जाती रहीं। ऐसे में बच्चे गर्मी में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।
-प्रमोद कुमार, प्रधानाध्यापक, पूर्व माध्यमिक विद्यालय श्यामपुर
-जिले में 182 परिषदीय विद्यालयों में बिजली के कनेक्शन नहीं हैं। इन विद्यालयों में बिजली के कनेक्शन कराने के लिए विद्युत निगम के अफसरों को लिखकर दिया गया है। जल्द ही इन विद्यालयों में बिजली कनेक्शन की समस्या दूर हो जाएगी। वहीं, बिजली विभाग ने 66 विद्यालयों में बारे में यह कहा है कि उनकी दूरी 40 मीटर मानक से अधिक है। लिहाजा, इसका एस्टीमेट बनाया जाएगा।
-कल्पना सिंह, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी, रामपुर