684 ग्राम पंचायत हैं जिले में।
200 गांवों में खेल मैदान विकसित हो चुके हैं।
28 अन्य गांवों में खेल मैदान विकसित हो रहे हैं।
- गांवों में खेल मैदान न होने से खाली खेतों में युवा क्रिकेट, वॉलीबॉल में बना रहे अपना भविष्य
रामपुर। ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ी मैदान के अभाव में खेत-खलिहान और सड़क किनारे क्रिकेट, वॉलीबॉल खेलकर खेल क्षेत्र में भविष्य बनाने को विवश हैं। वैसे जिले में कुल ग्राम पंचायत 684 हैं। इनमें 484 ग्राम पंचायतों में अभी तक खेल मैदान विकसित नहीं हो सके हैं। शेष 200 गांवों में मैदान सजा देने का सरकारी दावा है। देखा जा रहा है कि अधिकांश गांवों के मैदान की जमीन पर कब्जे हैं या फिर वह विकसित नहीं हैं। फिलहाल, खिलाड़ियों के लिए खेल विभाग में कई योजनाएं हैं, जिनका लाभ युवाओं को नहीं मिल पा रहा है।
जी हां, मंगलवार को रामपुर-स्वार मार्ग किनारे ग्रामीण क्षेत्र के युवा वॉलीबॉल खेल रहे थे। पूछने पर पता चला कि आसपास के गांवों में खेल मैदान नहीं हैं। इसलिए वह लोग सड़क किनारे खाली जगह में खेल रहे हैं। जिस जगह पर वह लोग वालीबाल टूर्नामेंट खेल रहे थे, वह खाली खेत रसूलपुर गांव के ही आरिफ का है। यहां टूर्नामेंट खेल रहे लोगों का उत्साह बढ़ाने के लिए तीन से चार सौ दर्शक मौजूद थे। वॉलीबॉल टूर्नामेंट में मौजूद रिजवान राजा, मास्टर शरीफ, मो. आसिफ, तारिक मोहम्मद, इरफान और साजिद का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में मेधाओं का अभाव नहीं है। दिक्कत केवल संसाधनों की है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के लिए खेलो इंडिया जैसी कई योजनाएं हैं, जो ग्रामीण क्षेत्र में दिखाई नहीं देती हैं। खेलने के लिए गांवों में मैदान तक नहीं हैं। किसी भी वॉलीबॉल टूर्नामेंट आयोजन के लिए किसानों के खाली खेत खोजने पड़ते हैं।
केवल पांच गांव में मैदान सजा देने का दावा
डीआरडीए के दस्तावेजों के मुताबिक, 2024-25 की बात की जाए मनरेगा के माध्यम से जिले में 28 गांव में खेल मैदान विकसित करने का लक्ष्य रखा गया था। इसमें से अब तक केवल पांच गांव में खेल के मैदान बन पाए हैं, जबकि 20 मैदानों पर कार्य जारी होने का दावा किया जा रहा है। तीन मैदानों का विकास अभी किसी न किसी वजह से अटका है। डीसी मनरेगा कार्यालय के मुताबिक चमरौआ ब्लॉक की एक ग्राम पंचायत के खेल मैदान पर विवाद है। इसके निस्तारण के उपरांत ही कार्य कराया जाना संभव है। इसी तरह सैदनगर ब्लॉक में सींघनखेड़ा में बेसिक शिक्षा विभाग की भूमि पर खेल मैदान विकसित होना है। इसमें एनओसी प्राप्त करने के लिए विभाग को पत्र लिखा गया है। स्वार क्षेत्र की एक ग्राम पंचायत में भी कार्यस्थल पर विवाद है। तहसील को स्थल चिह्नीकरण एवं पैमाइश के लिए पत्र लिखा गया है। उधर, डीसी मनरेगा अमित कुमार ने बताया कि मनरेगा के जरिए गांव में खेल मैदान विकसित करने का काम कराया जा रहा है। चालू वित्त वर्ष में 28 खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं।
वर्जन
अभी सोमवार और मंगलवार को हम लोगों ने खेमपुर की ओर से वॉलीबॉल टूर्नामेंट का आयोजन किया है। इस आयोजन के लिए खेल मैदान तलाश रहे थे। आसपास के गांवों में कोई मैदान नहीं मिला तो स्वार-रामपुर मार्ग किनारे रसूलपुर के आरिफ के खाली खेत में टूर्नामेंट कराया है। खिलाड़ियों के लिए सभी योजनाएं केवल सरकारी कागजों में हैं।
- आमिर अली पाशा, रसूलपुर फरीदपुर
खेलो इंडिया जैसी कई बड़ी योजनाएं हैं, जिनका लाभ खिलाड़ियों को नहीं मिल रहा है। ग्राम पंचायतों में खेल मैदान नहीं हैं और जहां खेल मैदान के नाम पर कुछ जमीनें हैं भी, उन पर अवैध कब्जे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में एक से एक खिलाड़ी हैं और खेल के क्षेत्र में भविष्य बनाने के लिए युवा आतुर भी हैं, लेकिन संसाधनों के अभाव में गांव के युवा खेल क्षेत्र में भविष्य नहीं बना पा रहे हैं।
- मो. रिजवान, खेमपुर