रामपुर। ड्राइविंग सीखे बिना भी ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) हासिल कर लेने के दिन अब लद रहे हैं। डीएल जारी करने से पहले ऑटोमैटिक टेस्टिंग ट्रैक परीक्षण की शर्त कई धुरंधरों पर भारी पड़ चुकी है। सड़कों पर मनमाने ढंग से फर्राटा भरने वाले कई युवा निर्धारित समय और तय शर्तों पर टेस्टिंग ट्रैक पर सफलता नहीं पा सके। इन स्थितियों के बीच उनके डीएल की प्रक्रिया अटक गई।
आंकड़ों की बात करें तो एक माह में दोपहिया वाहन के 268 आवेदक फेल हो चुके हैं। वहीं चौपहिया वाहन के 289 आवेदक बाहर का रास्ता देख चुके हैं। इसके चलते उनकी डीएल पाने की ख्वाहिश फिलहाल अधूरी रह गई। हालांकि परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिनके आवेदन खारिज हो गए हैं, वे कुछ दिन के अभ्यास से खुद को कुशल ड्राइवर बना लें। निर्धारित मापदंडों के अनुसार ट्रैक परीक्षण में सफल होने पर वह डीएल हासिल कर सकेंगे।
अंग्रेजी के एस अक्षर जैसे ट्रैक पर होता है टेस्ट
शहजाद नगर में बने ऑटोमैटिक टेस्टिंग ट्रैक पर अंग्रेजी के एस अक्षर जैसे ट्रैक पर वाहन कुशलता से चलाना होता है। यह प्रक्रिया दोपहिया और चौपहिया दोनों श्रेणी के लिए लागू होती है। सामान्य तौर पर 50 सेकेंड में एस शेप में कार को पार्किंग करने वाला टेस्ट में पास माना जाता है। जबकि 70 या उससे अधिक सेकंड का समय लेने वाला फेल। टेस्ट देने वाले को पहले पूरी प्रक्रिया स्क्रीन पर दिखाई जाती है, जिससे कि वह आसानी से टेस्ट दे सके। चौपहिया वाहन में रिवर्स गियर में ड्राइविंग और पार्किंग के अभ्यास में भी लोग चूक रहे हैं।
-ऑटोमैटिक ड्राइविंग ट्रैक पर कोई व्यक्ति कुछ सेकंड में ही पास हो जाता है तो कई लोग दोगुना समय लेकर भी फेल हो रहे हैं। प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। जिसको वास्तव में वाहन चलाना आता है उसका ही लाइसेंस बन रहा है।
-शलभ गुप्ता, संचालक, परफेक्ट वाहन टेस्टिंग सेंटर