रामपुर। जनधन खातों को अल्पसंख्यक विद्यार्थियों के खाते दर्शाकर 1.48 करोड़ रुपये छात्रवृत्ति घोटाले में वक्फ निरीक्षक रामसुमेर की गिरफ्तारी के बाद अब अन्य आरोपियों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है। अब तक की जांच में सामने आया है कि तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, मदरसा प्रबंधक, कंप्यूटर ऑपरेटर और बैंक मित्र समेत चार शिक्षण संस्थानों के प्रबंधकों तथा कुछ अन्य की भूमिका भी संदिग्ध है। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के बाद घोटाले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका पर भी स्थिति साफ होने की उम्मीद है।
अल्पसंख्यक छात्रों को छात्रवृति विभाग की ओर से दी जाती है। छात्रवृति वितरण में रामपुर में घोटाले का यह मामला 2018-19 से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आया था कि छात्रवृत्ति की रकम फर्जी तरीके से जनधन खातों में भेजी गई। इसके बाद 530 छात्रों के खातों से 56.71 लाख रुपये निकाल लिए गए। मामला खुलने के बाद मार्च 2019 में 861 खाते फ्रीज कर दिए गए थे।
इसके बाद तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी मोहम्मद खालिद ने जुलाई 2019 में सिविल लाइंस थाने में मदरसा प्रबंधक मोहम्मद रफी, उसके साले फाजिल, बैंक मित्र दानिश और कंप्यूटर ऑपरेटर रामबाबू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसी क्रम में वक्फ निरीक्षक रामसुमेर भी जांच के दायरे में आया और करीब सात साल से फरार चल रहा था। ईओडब्ल्यू ने बुधवार को उसे इटावा से गिरफ्तार कर लिया।
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छात्रवृत्ति घोटाले की जांच पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा कर रही है। प्रकरण में जो भी तथ्य जांच के दौरान सामने आएंगे, उसके आधार पर एजेंसी आगे की कार्रवाई करेगी। विभाग की ओर से पत्र मिला है जिसमें तत्कालीन वक्फ निरीक्षक रामसुमेर की गिरफ्तारी की जानकारी मिली है। - गौरव खड़ायत, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी