शाहबाद। जिंदा महिला का मृत्यु प्रमाणपत्र जारी होने की खबर प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने तत्काल संज्ञान लिया और पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तलब करते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है।
एसडीएम आदेश कुमार ने बताया कि डीएम अजय कुमार द्विवेदी के निर्देश पर बीडीओ धीरेंद्र कुमार से पूरे मामले में लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि प्रशासनिक चूक किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
एसडीएम ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि रवानी पट्टी उदा गांव निवासी मेहंदी हसन की मृत्यु के बाद उनका मृत्यु प्रमाणपत्र पहले ही जारी किया जा चुका था। बाद में वह प्रमाणपत्र कहीं गुम हो गया। इसके बाद परिजनों ने दोबारा मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन किया। इसी दौरान लापरवाही के कारण मृतक मेहंदी हसन के स्थान पर उनकी पत्नी शरीफन का मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि यह बेहद गंभीर त्रुटि है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि आवेदन की जांच, डेटा फीडिंग अथवा प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में किस स्तर पर चूक हुई। दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि छह माह पहले पति की मौत के बाद मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए महीनों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहीं शरीफन को उस समय बड़ा झटका लगा, जब मृतक पति की जगह उनका ही मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए थे। अब डीएम के संज्ञान लेने और स्पष्टीकरण तलब किए जाने के बाद त्रुटि के जल्द सुधार और जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।
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निरस्त किया गया प्रमाणपत्र
शाहबाद। अमर उजाला के शुक्रवार के अंक में संवाद न्यूज एजेंसी की खबर प्रकाशित होने के बाद खंड विकास कार्यालय से लेकर जिला स्तर तक प्रशासन में हलचल मच गई। आनन-फानन में जिंदा महिला के नाम से जारी मृत्यु प्रमाणपत्र को 31 जुलाई की सुबह तत्काल निरस्त कर दिया गया। संवाद