जिला जज/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अनिल कुमार गुप्ता ने कहा है कि 12 नवंबर को आयोजित राष्ट्रीय मेगा लोक अदालत में 10 हजार से अधिक वाद नियत किए गए हैं जोकि तय होंगे। इसके अलावा करीब 55 हजार प्री ट्रायल वाद लग चुके हैं जोकि अदालतों में आने से पहले ही निपटा दिए जाएंगे। लोक अदालत का मकसद आवाम में सुलभ एवं सक्षम न्याय दिलाना है।
जनपद न्यायाधीश ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि न्यायमूर्ति उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार देश एवं प्रदेश के सभी तहसील से लेकर उच्चतम न्यायालय के स्तर तक के किसी भी न्यायालय एवं विभागीय मामलों को आपसी सुलह समझौते के आधार पर वादों का निस्तारण कराने के लिए 12 नवंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन होगा। देश के नागरिकों को त्वरित, सस्ता, सुलभ न्याय पाने का मौलिक अधिकार हैं। लोक अदालत में वादों के निस्तारण के लिए किसी प्रकार का शुल्क देय नहीं होता और मामलों के निस्तारण पर न्याय शुल्क की वापसी की भी व्यवस्था हैं।
उन्होंने बताया कि लोक अदालत द्वारा पारित निर्णय के विरूद्ध किसी भी न्यायालय में अपील नहीं की जा सकती। श्री गुप्ता ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह योग्य सभी फौजदारी, दीवानी, भरण-पोषण, वैवाहिक, पारिवारिक, स्टाप, पंजीयन, मोटर दुर्घटना प्रतिकर, चकबन्दी, श्रम, उपभोक्ता फोरम, भूमि अधिग्रहण, बाट माप, कराधान प्रकरण, बैंक रिकवरी, किरायेदारी, ऋण वसूली, उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र, बिजली चोरी, जल एवं गृृहकर, सेवा संबंधित मामले, मनोरंजनकर, विकास प्राधिकरण, वन, पुलिस, दुकान एवं वाणिज्य अधिनियम, रेलवे दावा, स्थायी लोक अदालत, मनरेगा आदि के प्रकरण संदर्भित किए जा सकते हैं।
राष्ट्रीय लोक अदालत में निस्तारण के लिए लगभग 10 हजार वाद नियत किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत का वृृहद स्तर पर प्रचार-प्रसार किया गया है ताकि समाज के अंतिम व्यक्ति को इसकी जानकारी हो सके। सरकार की मंशा है कि गरीब व्यक्तियों को आसानी से न्याय दिलायी जा सके और न्यायालयोें के अनावश्यक भाग दौड़ तथा अपव्यय से उन्हें बचाया जा सके।