रामपुर। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज किला की शिक्षिका तृप्ति माहौर को लखनऊ में राष्ट्रपति पुरस्कार मिला। इस पुरस्कार तक वह ऐसे ही नहीं पहुंची, बल्कि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कई उत्कृष्ट कार्य भी किए। बच्चों को सुलभ शिक्षा दिलाने के लिए जहां उन्होंने अपने प्रयासों से कॉलेज में प्रोजेक्टर और सामाजिक विज्ञान की प्रयोगशाला स्थापित कराई, वहीं कोरोना काल में भी बच्चों की पढ़ाई जारी रहे, इसके लिए यू-ट्यूब पर चैनल बनाया। ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
रविवार को लखनऊ में शिक्षिका तृप्ति माहौर को राष्ट्रपति पुरस्कार मिला। यह पुरस्कार उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने दिया। राष्ट्रपति पुरस्कार तक पहुंचना कोई आसान कार्य नहीं था। इसके लिए शिक्षिका ने जमीनी स्तर पर मेहनत भी की। न सिर्फ उन्होंने खुद अच्छी शिक्षा हासिल की, बल्कि जीवन में खुद भी बच्चों को शिक्षित करने के लिए शिक्षा के क्षेत्र में आगे आ गईं। उनके प्रयासों से कॉलेज में स्थापित प्रोजेक्टर और इतिहास और सामाजिक विज्ञान की प्रयोगशाला बच्चों की शिक्षा के लिए मददगार साबित हो रही है। इससे जहां बच्चों को प्रत्येक विषय को समझने में आसानी होती है, बल्कि उनके दिमाग में उठने वाले सवालों के जवाब भी आसानी से मिल जाते हैं। तृप्ति ने कोरोना काल में भी बच्चों की शिक्षा को प्रभावित नहीं होने दिया। बच्चे स्कूल नहीं आ सकते थे और वे भी स्कूल नहीं जा सकती थीं, लिहाजा उन्होंने ऑनलाइन शिक्षा देने के साथ ही अपने नाम यू-ट्यूब पर एक चैनल भी बना लिया। इसके बाद उन्होंने बच्चों को चैनल के माध्यम से भी शिक्षा देनी शुरू कर दी। इसके अलावा सामाजिक एवं राजकीय कार्यों में भी उनका अहम योगदान है। यहां तक कि बीते दो सालों से वे मतदाता स्वीप अभियान की आइकन हैं और माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से मिशन शक्ति अभियान की रोल मॉडल भी हैं। उनके इन्हीं प्रयासों की बदौलत वे शोहरत की ऊंचाइयों पर हैं।