रामपुर। जिलाधिकारी ने कोविड-19 के दृष्टिगत शासन एवं प्रशासन की अपेक्षाओं के बारे में प्रधानों को जानकारी देते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बाहरी राज्यों या अन्य जिलों से वापस अपने घरों को आने वाले लोगों में यदि कोरोना के कोई लक्षण नहीं भी हैं, तब भी उन्हें सात दिनों तक होम आइसोलेशन का सख्ती से पालन करना होगा। यदि किसी व्यक्ति में खांसी, जुकाम, गले में खराश, बुखार या सूंघने की शक्ति में कमी आदि कोरोना के लक्षण होते हैं, तो उन्हें गंभीरता पूर्वक 14 दिन का होम आइसोलेशन का सख्ती से पालन करना होगा। इस दौरान इन लोगों को समय से जरूरी दवाइयों की उपलब्धता हो जाए तथा वह किसी अन्य व्यक्ति से न मिले इसकी भी निगरानी होनी चाहिए।
रविवार को जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ और मुख्य विकास अधिकारी गजल भारद्वाज ने वर्चुअल कान्फ्रेंस के माध्यम से जनपद के नवनिर्वाचित ग्राम प्रधानों के साथ संवाद किया। कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण उत्पन्न वर्तमान परिस्थितियों में गांव में संक्रमण को प्रभावी तरीके से रोकने में ग्राम प्रधानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ग्राम प्रधान गांव स्तर पर गठित निगरानी समिति के अध्यक्ष के रूप में भूमिका निभाते हैं, इसलिए प्रधानों की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वह निगरानी समितियों के माध्यम से बाहर से आने वाले लोगों की सूची तैयार कराएं तथा होम आइसोलेशन का सख्ती से पालन कराने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
यदि संक्रमित लोगों के पास आइसोलेशन के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, तो गांव के विद्यालयों में आइसोलेशन की व्यवस्था कराएं। उन्होंने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से ही कोरोना के संक्रमण को रोकने में मदद मिलेगी। ग्राम पंचायतों में साफ-सफाई और सैनिटाइजेशन कार्य को निर्धारित रोस्टर के अनुसार कराया जाएगा। साफ-सफाई के इस कार्य में गांव के समाजसेवी एवं युवक मंगल दल के लोगों का भी स्थानीय स्तर पर सहयोग लिया जाए, ताकि साफ सफाई एवं स्वच्छता के कार्य को समुदाय आधारित सहयोगात्मक स्वरूप प्रदान किया जा सके।
बाहर से वापस अपने घरों को लौटने वाले कामगारों के सामने रोजगार एवं आर्थिक समस्याओं का संकट न उत्पन्न होने पाए, इसके लिए मनरेगा के तहत व्यापक स्तर पर कार्य प्रारंभ होंगे, ताकि लोगों को रोजगार के अवसर मिल सके तथा जनपद के तालाबों की खुदाई कराकर उनमें जल संरक्षण भी कराया जा सके।