रामपुर। स्वाति मेंथोल फैक्टरी में साल 2006 में हुए अग्निकांड के मामले में कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। जिसमें कहा गया है कि अभियोजन पक्ष अपना केस साबित करने में असफल रहा है। इसलिए, साक्ष्य के अभाव में फैक्टरी प्रबंधतंत्र के पांचों आरोपियों को उनके ऊपर लगाए गए गैर इरादतन हत्या और साक्ष्य नष्ट करने के आरोपों से बरी किया जाता है।
सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के फैजुल्लानगर स्थित स्वाति मेंथोल फैक्टरी में 15 फरवरी 2006 को भीषण आग लग गई थी। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक हादसे में फैक्टरी कर्मी सीताराम गुप्ता, राजेश, विशंभर प्रसाद और लक्ष्मी नारायण की मौत हो गई थी, जबकि उस्मान, अमीर अहमद, घासीराम, विश्राम सिंह, नंदकिशोर, कन्हैया लाल, अंसार अली, यासीन, रमेश, जिया उल नबी व फैसल गंभीर रूप से झुलस गए थे। आग इतनी भयंकर थी कि उसे बुझाने में दमकल विभाग के कर्मियों को घंटों मशक्कत करनी पड़ी थी। इस मामले में हरनारायण गुप्ता की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। विवेचना के दौरान तत्कालीन अग्निशमन अधिकारी जेपी राठौर ने पुलिस को बयान दर्ज कराया था कि इतनी बड़ी फैक्टरी में आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन नहीं थे। पुलिस ने विवेचना के बाद चार्जशीट दाखिल कर दी थी। जिसमें पुलिस ने 26 लोगों को गवाह बनाया है। अभियोजन पक्ष की ओर से वादी मुकदमा सहित कई गवाहों के बयान कोर्ट में दर्ज कराए और आरोपियों को कड़ी सजा देने की मांग की जबकि, बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि गवाहों के बयानों में काफी विरोधाभास है और अभियोजन द्वारा अपना केस साबित नहीं किया गया है। इस पर 17 दिसंबर को अभियोजन व बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने अपनी बहस पूरी की थी। तीन जनवरी को कोर्ट को फैसला सुनाना था।
जिला जज गौरव कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट ने सोमवार को अपना फैसला सुना दिया। उन्होंने अपने फैसले में कहा है कि अभियोजन पक्ष अपना केस साबित करने में नाकाम रहा है। लिहाजा, सुरेंद्र कुमार गुप्ता, संचित गुप्ता, रामेंद्र गुप्ता, नितिन उर्फ सचिन गुप्ता और संजय अग्रवाल के ऊपर लगाए गए धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) और 201 (साक्ष्य नष्ट करना) आईपीसी के आरोपों से दोषमुक्त किया जाता है।
कोट
कोर्ट के फैसले की जानकारी हुई है। मैं और मेरा परिवार कोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। फैक्टरी प्रबंधन तंत्र को कड़ी सजा मिलनी चाहिए थी। उनकी लापरवाही से ही मेरे पति की असमय मृत्यु हुई है। जिससे मेरा परिवार दु:खी है। -बुधिया देवी, पत्नी, मृतक विशंभर प्रसाद, निवासी ग्राम रतनपुरा जनूबी, रामपुर।
कोट
-अभियोजन पक्ष फैसले से संतुष्ट नहीं है। फैसले का अध्ययन करने के बाद सरकार फैसले की अपील करेगी। -अरूण प्रकाश सक्सेना, जिला शासकीय अधिवक्ता, फौजदारी।