करीब एक सप्ताह तक सड़कों पर संघर्ष करने वाले शिक्षामित्र अब सोमवार से स्कूल पढ़ाने पहुंचेंगे। अभी तक यह असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि वो शिक्षामित्र की हैसियत से स्कूल जाएंगे या समायोजित शिक्षक की।
हाईकोर्ट ने पिछले दिनों आदेश जारी कर शिक्षामित्रों का शिक्षक पद पर किया गया समायोजन रद कर दिया था।
आदेश के बाद प्रदेशभर के शिक्षामित्र सड़कों पर उतर आए थे। रामपुर में शिक्षामित्रों का गुस्सा सड़कों पर खूब देखा गया। धरना-प्रदर्शन करने के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षामित्रों को संयम बरतने की अपील की। बीच का रास्ता निकालने का आश्वासन दिया।
शनिवार को वेतन को लेकर बीएसए दफ्तर में ताले तक लगा दिए थे। सप्ताह भर के आंदोलन के बाद अब शिक्षामित्र स्कूलों में पढ़ाने पर राजी हो गए हैं। वो सोमवार से स्कूलों में पढ़ाने जाएंगे। सवाल ये है कि वो किस रूप में स्कूल जाएंगे। हाईकोर्ट ने शिक्षक पद पर किया समायोजन रद कर दिया है, लेकिन विभाग के पास समायोजन रद होने का आदेश नहीं पहुंचा है।
ऐसे में फिलहाल तो वो उन्हीं स्कूलों में जाएंगे जहां उनको पूर्व में नियुक्ति दी गई है। आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सैयद जावेद मियां का कहना है कि कोर्ट का आदेश अभी तक विभाग को नहीं मिला है। समायोजन रद होने का कोई आदेश बीएसए की ओर से भी नहीं जारी किया गया है।
दिल्ली में 28 सितंबर को होने वाले शिक्षामित्रों के प्रदर्शन को दिल्ली प्रशासन ने अनुमति नहीं दी है। समायोजन रद होने के विरोध में शिक्षामित्र 28 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर में प्रदर्शन करने का ऐलान किया था। इसके लिए कुछ ने दिल्ली सरकार से संपर्क साधा, लेकिन उन्हें धरना-प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली है।