रामपुर। शहर में करीब सौ करोड़ रुपये खर्च कर शहर में डाली गई सीवर लाइन नौ साल बीतने के बाद भी शहर के अधिकांश हिस्सों में चालू नहीं हो सकी है। प्रोजेक्ट तो 2005 में ही पास हो गया था, लेकिन सरकार पर सरकार बदलती रही और प्रोजेक्ट अधर में लटका रहा। इसके चलते शहर के कई इलाकों में सीवर लाइन बिना चालू हुए ही धंस गई। सीवर लाइन तो धंसी ही सड़कों को साथ में ले डूबी। इसके अलावा वाटर पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हुई तो कई जगह पानी की किल्लत से भी लोग जूझते दिखे।
मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार ने साल 2005 में रामपुर में सीवेज सिस्टम प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। करीब सौ करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज) को सौंपी गई थी। सीएंडडीएस ने प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए शहर को चार जोन में बांट दिया था। प्रोजेक्ट के तहत पहले जोन नवाब गेट, मिस्टन गंज, जेल रोड, सराफा बाजार, तोपखाना और राजद्वारा आदि क्षेत्र में 65.97 किलोमीटर, जबकि दूसरे जोन शाहबाद, बरेली गेट, हाथीखाना और पुरानागंज आदि क्षेत्र में 78 किलोमीटर सीवर लाइन डाली गई थी।
पहले जोन का घाटमपुर और दूसरे जोन का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट केमरी रोड पर पहाड़ी गांव के पास बनाया गया था, लेकिन प्रोजेक्ट चालू होने से पहले ही 2007 में सूबे में सत्ता परिवर्तन हो गया और बसपा की सरकार बन गई। इसके बाद यह काम लटक गया। 2012 में जब अखिलेश यादव की सरकार सत्ता में आई तो इस प्रोजेक्ट पर फिर से काम शुरू हुआ। जोन एक और जोन दो की सीवर लाइन के जोड़ ठीक करने एवं शेष कार्य पूरा करने के लिए शासन ने करीब 15 करोड़ रुपये और जारी किए थे। सपा सरकार के कार्यकाल में निर्माण कार्य तो पूरा हो गया, लेकिन कनेक्शन नहीं हो सके। वहीं, 2017 में सूबे में फिर से सत्ता बदल गई और भाजपा सरकार में आ गई, लेकिन सीवर लाइन चालू नहीं हो सकी थी। हालांकि, करीब 17 करोड़ रुपये की लागत से आठ हजार सीवर चैंबर बनाकर लोगों के कनेक्शन जोड़ने का काम हुआ था। लेकिन, इसके बाद भी शहर के कुछ इलाकों की सीवर लाइन चालू हो सकी है।
सहूलियत की जगह लोगों की मुसीबत बन गया प्रोजेक्ट
16 साल पहले सीवर को मंजूरी मिली थी, तो लोगों में उम्मीद जगी थी कि अब गंदगी से निजात मिल जाएगी। सीवर लाइन से बहुत सुविधा होगी, लेकिन सीवर सिस्टम मंजूर होने के बाद से पूरा होने में ही 12 साल बीत गए। 2017 में प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद भी आए दिन जगह-जगह सीवर लाइन धंसने की बात सामने आती रहती है। जिला अस्पताल के सामने, नालापार, पहाड़ी गेट की सीवर लाइन तो कई कई बार धंस चुकी है।