टांडा (रामपुर)। रमजानुल मुबारक का रहमत का पहला अशरा शनिवार को खत्म होने के साथ ही मगफिरत का दूसरा अशरा शुरू हो गया है। दूसरे अशरे में सच्चे दिल से की गई तौबा कुबूल होती है और गुनाहों की माफी मिलती है। उलमा-ए-कराम ने रोजेदारों से इबादतों संग कोरोना से निजात और लोगों की सलामती के लिए दुआ मांगते रहने की अपील की है।
रमजान माह में मुकद्दस महीने में तीन अशरे होते हैं। एक अशरा 10 दिन का होता हैं। इस तरह देखा जाए तो रमजान के 30 दिनों को तीन अशरों में बांटा गया है। एक रमजान से 10 रमजान तक पहला अशरा रहमत का होता है। इस अशरे में अल्लाह पाक अपने बंदों पर रहमत नाजिल फरमाता है। दूसरा अशरा मगफिरत का है यानी गुनाहों से माफी का। ये अशरा 10 रमजान को मगरिब की अजान से शुरू होकर 20 रमजान को मगरिब की अजान से पहले तक है। रमजान के महीने में रहमत के दरवाजे खुल जाते हैं। मौलाना जमील अहमद ने बताया कि रमजान के दूसरे अशरे में गुनाहगारों की तौबा कुबूल की जाती है। इसलिए इस अशरे में रोजेदारों को गुनाहों के लिए माफी तलब करनी चाहिए। इस अशरे में पंच वक्त नमाज एहतेमाम करते हुए तिलावत-ए-कलाम पाक में दिल लगाना चाहिए। भूखों को खाना खिलाएं, जरूरतमंदों की मदद करें और रोजेदारों को इफ्तार कराएं। इससे खुदा राजी होकर अपने बंदों को बरकत की रोजी इनायत करता है। साथ इस वक्त पूरी दुनिया खासकर हिंदुस्तान में कोरोना जैसी भयानक बीमारी अपनी चरम है। तो सभी रोजेदारों को चाहिए कि वो अल्लाह से मागफिरत की दुआ करने के साथ ही कोरोना से सबकी हिफाजत और इस बीमारी से मुकम्मल निजात की दुआ करे।