रामपुर। जौहर ट्रस्ट की ओर से खरीदी गई 126 एकड़ जमीन के मामले में निर्धारित शर्तों का पालन नहीं के आरोप में दर्ज वाद की सुनवाई के दौरान ट्रस्ट के अधिवक्ता ने एडीएम (प्रशासन) की कोर्ट क्षेत्राधिकार पर सवाल उठाए। अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि इस वाद की सुनवाई का अधिकार एडीएम को नहीं बल्कि एसडीएम की कोर्ट को हैै। हालांकि इस तर्क पर सरकारी वकील ने आपत्ति जताई और कहा कि यह बात तो उस समय कही जानी चाहिए थी जब वाद दर्ज किया गया है। एडीएम की कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई की अगली तिथि 14 अक्तूबर निर्धारित कर दी है।
सांसद आजम खां की अध्यक्षता वाली मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट सपा की सरकार में 12.5 एकड़ से अधिक जमीन खरीदने की अनुमति कुछ शर्तों के अधीन दी गई थी। इस मामले में शिकायत की गई थी कि जिन शर्तों के अधीन 12.5 एकड़ से अधिक जमीन खरीदने की अनुमति दी गई थी उसका पालन नहीं किया गया है। जिलाधिकारी ने मामले की जांच 2019 में तत्कालीन एसडीएम सदर पीपी तिवारी को सौंपी थी। तिवारी ने जांच में आरोप को सही पाया था और उन्होंने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी थी। रिपोर्ट के आधार पर डीएम की कोर्ट में वाद दर्ज कर लिया गया था, जिसे सुनवाई के लिए एडीएम (प्रशासन) जेपी गुप्ता की कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया था। एडीएम की कोर्ट में वाद की सुनवाई चल रही है। सुनवाई के दौरान ट्रस्ट अधिवक्ता आपत्ति दाखिल कर चुके हैं और उस पर सरकारी वकील अपनी प्रति आपत्ति भी लगा चुके हैं। बुधवार को सुनवाई के दौरान ट्रस्ट के अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि इस वाद के सुनवाई के अधिकार एडीएम की कोर्ट को नहीं है, बल्कि एसडीएम की कोर्ट मेें इसकी सुनवाई होनी चाहिए। इस पर सरकारी वकील ने आपत्ति जताई और कहा कि यह बात को उस वक्त कही जानी चाहिए थी जब वाद दर्ज किया गया था। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई की अगली तिथि 14 अक्तूबर निर्धारित की है।