लोकसभा चुनाव 2014 में रामपुर के 1500 पुलिस कर्मियों को प्रदेश के आठ जिलों में ड्यूटी करने के दौरान भत्ता नहीं मिला था। इसकी शिकायत पर जांच के आदेश हुए थे। लेकिन न जांच का पता चला और न भत्ते का। अब भारत निर्वाचन आयोग ने राज्य निर्वाचन आयोग को नोटिस भेजकर भत्ता मामले में जांच रिपोर्ट पांच दिन के भीतर तलब की है। 1500 पुलिस कर्मियों के करीब पचास लाख रुपये के इस घोटाले में दो साल से सिर्फ पत्रचार हो रहा था, लेकिन कार्रवाई कोई नहीं हो सकी थी। आयोग की सख्ती के बाद कार्रवाई की उम्मीद जगी है।
लोकसभा चुनाव वर्ष 2014 में रामपुर जिले में तैनात करीब डेढ़ हजार पुलिस कर्मी लखीमपुर खीरी, कन्नौज, गाजीपुर, हरदोई, सुल्तानपुर, आजमगढ़, बनारस और मथुरा जनपदों में चुनाव ड्यूटी पर गए थे। ड्यूटी तो इन लोगों ने कर ली, लेकिन इनको चुनावी ड्यूटी भत्ता नहीं दिया गया था, जिसके बाद इस मामले में पूर्व सिपाही मोहम्मद रफी ने आरटीआई के तहत पुलिस से जानकारी मांगी थी, लेकिन सूचना नहीं दी गई, जिस पर मामला राज्य सूचना आयोग पहुंचा, लेकिन वहां भी कोई सूचना नहीं दी गई, इसके बाद इस मामले में भारत निर्वाचन आयोग की शरण ली गई।
आरटीआई के तहत केंद्रीय निर्वाचन आयोग से सूचना मांगी गई थी। इस मामले में भारत निर्वाचन आयोग ने प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बाद भी सिर्फ संबंधित जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारी/ जिलाधिकारियों को पत्राचार ही हुआ था। जिला निर्वाचन अधिकारी ने संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिख दिया। इसके आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिसके बाद इस मामले में अपील दायर की गई थी। भारत निर्वाचन आयोग ने अब इस मामले में फिर से राज्य निर्वाचन आयोग को पांच दिन के भीतर जांच रिपोर्ट आयोग को भेजने के आदेश जारी किए हैं।