बिलासपुर की चड्ढा पेपर मिल का निरीक्षण करते अधिकारी।
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दूषित पानी आने की शिकायत पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने बुधवार को क्षेत्र की चड्ढा पेपर मिल का निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने पानी की जांच के लिए नमूने लिए, जिन्हें प्रयोगशाला भेजा गया है।
क्षेत्र के ग्राम नगरिया खुर्द स्थित चड्ढा पेपर मिल से दूषित पानी निकल रहा है। किसानों ने कई मर्तबा शासन व प्रशासन से शिकायतें कीं। भाकियू के बैनर तले किसानों ने मिल गेट पर धरना-प्रदर्शन भी किया, जिसमें किसानों ने मिल प्रशासन पर आरोप लगाया कि उनकी फैक्ट्री के दूषित पानी से तमाम गांवों के किसानों की फसलें खराब हो रही हैं। बाद में मिल प्रशासन ने मामले को निपटा लिया।
बुधवार दोपहर उपजिलाधिकारी डीएस गुप्ता और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक सहायक वीके राजपूत, सहायक अधिकारी रोहित सिंह अचानक मिल में पहुंचे। उन्होंने मिल के प्रबंधक प्रदीप वर्मा से मुलाकात कर मिल के ईटीपी प्लांट का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मिल के मैनेजर ने उन्हें बताया कि उन्होंने मिल के बराबर की 75 एकड़ जमीन में अपनी यूकेलिप्टस के पेड़ लगा रखे हैं।
मिल का पानी उनके पौधों की सिंचाई के काम आता है। वह मिल के पानी को बाहर किसानों के खेतों में नहीं डालते हैं। टीम ने प्लांट से निकलने वाले पानी के नमूने भी लिए और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की माप लेबोरेटरी भेजने के निर्देश दिए। इसके बाद टीम ने मिल के पानी की मौके पर भी जांच की तो जांच में पानी की पीएच वेल्यू 7.3 प्रतिशत आई।
जबकि, पीएच वेल्यू सात प्रतिशत आनी चाहिए थी। मैनेजर ने तर्क दिया कि फैक्ट्री के पानी की पीएच वेल्यू 7-9 प्रतिशत के बीच तक आनी चाहिए। इसलिए मानक के अनुरूप उनकी मिल का पानी दूषित नहीं है। टीम ने प्रदूषण संयंत्र भी चेक किया तो संचालित मिला।