रामपुर। डीजल के बढ़ते दामों से शहर के ट्रांसपोर्टरों की कमर तोड़ दी है। कोरोना काल के बाद गाड़ियां चलने का नंबर आया तो डीजल के दाम बढ़कर 90 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गए। ट्रांसपोर्टर की हालत यह हो गई है कि जहां उनका मुनाफा 30 हजार होता था, वहां सिर्फ चार हजार रुपये ही बच पा रहे हैं। आलम यह है कि गाड़ियों के ऋण की किश्त तक नहीं निकल पा रही है। ऐसे में कई ट्रांसपोर्टर तो अपनी गाड़ियां बेचने को मजबूर हो गए हैं।
कोरोना संक्रमण की वजह से ट्रांसपोर्टर आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। पहले जहां कोरोना की वजह से गाड़ियां न चलने की वजह से काम नहीं हो सका था, वहीं अब डीजल के तेजी से बढ़ रहे दामों ने ट्रांसपोर्टरों की कमर तोड़ दी है। ट्रांसपोर्टरों की मानें तो 20 हजार किलोमीटर चलने के बाद करीब 25 दिन बाद गाड़ी वापस लौटती है और बचत महज चार हजार रुपये ही हो पाती है। ऐसे में गाड़ियों की किश्तें तक निकालना मुश्किल हो गया है। यह हाल किसी एक ट्रांसपोर्टर का नहीं, बल्कि अधिकांश ट्रांसपोर्टरों को यही हाल है। कई ट्रांसपोर्टरों ने अपनी गाड़ियां बेच दी हैं।
ट्रांसपोर्ट के काम की बहुत बुरी स्थिति है। हमारे पास पहले दस गाड़ियां थीं, लेकिन अब सिर्फ पांच गाड़ियां बची हैं। पहले कोरोना की वजह से स्थिति खराब हुई और अब डीजल के दाम हर रोज बढ़ रहे हैं। मुनाफा भी कम हो गया है। वहीं, कंपनियां किराया बढ़ाने को तैयार नहीं हैं। कई तो सीमेंट फैक्ट्रियां भी नहीं खुल सकी हैं, जिसकी वजह से हमारा काम हल्का हो गया है। सरकार को चाहिए कि ट्रांसपोर्टर के बारे में भी कुछ सोचे।
- दानिश खां, ट्रांसपोर्टर
हमारी गाड़ियां असम, गुजरात समेत शहर के विभिन्न राज्यों में चलती हैं। आज स्थिति यह हो गई है कि एक गाड़ी से सिर्फ चार हजार रुपये ही बचते हैं। ऋण की किश्त तक पूरी नहीं हो पाती, जबकि इन्हीं गाड़ियाें से पहले किश्त भी निकल जाती थी और हमें भी कुछ बच जाया करता था। सब कुछ डीजल के रेट में इजाफा होने की वजह से हो रहा है। सरकार को हम लोगों के बारे में भी कोई सकारात्मक कदम उठाना चाहिए।
- जुल्फिकार अली खां, ट्रांसपोर्टर
पहले ट्रांसपोर्ट का काम अच्छा था। डीजल के रेट कम थे और किराया भी सही था, लेकिन अब तो डीजल के रेट भी आसमान छू रहे हैं। स्थिति यह है कि पांच गाड़ियां बिक चुकी हैं और बाकी भी कब बिकने की नौबत आ जाए कहा नहीं जा सकता। ऐसे में सरकार को चाहिए कि ट्रांसपोर्ट कारोबार के बारे में कुछ ठोस कदम उठाए, जिससे उन्हें राहत मिल जाए। साथ ही कुछ बचत हो तो परिवार भी चल पाए।
- इरफान खां, ट्रांसपोर्टर
पहले हमारे पास 12 गाड़ियां थीं। काम अच्छा चल रहा था, लेकिन कोरोना और डीजल के आसमान छूते रेट ने हमारी कमर तोड़ दी है। हालात यह हो गए कि अब सिर्फ तीन गाड़ियां ही बच सकी हैं। कारोबार खत्म होने की कगार पर है। ऐसे में यदि सरकार ट्रांसपोर्ट को कुछ मदद पहुंचाए तो कुछ हालात सही हो सकते हैं। वैसे ही लॉकडाउन में खाने कमाने के लाले पड़ गए हैं, अब घर चलाना भी मुश्किल हो रहा है।
- नवेद खां, ट्रांसपोर्टर
पिछली बार कोरोना काल में माल वाहक वाहनों के टैक्स में एक माह की छूट दी गई थी। जबकि, यात्री वाहनों को दो माह के टैक्स की छूट दी गई थी। लेकिन, इस बार ट्रांसपोर्ट के लिए सरकार की ओर से कोई मदद नहीं की गई है।
- सुरेन्द्र सिंह, एआरटीओ, रामपुर