संविधान के अनुच्छेद 17 द्वारा छुआछूत को बेशक 67 साल पहले खत्म कर दिया हो पर हकीकत की जमीन पर यहीं कहीं न कहीं आज भी लागू है। कानून के राज में भी सामाजिक तौर पर वाल्मीकि बिरादरी को अपमानित करने का काम कुछ लोग कर रहे हैं। वाल्मीकि समाज के लोगों का दर्द यह है कि बार्बर शॉप चलाने वाले लोग उनकी बिरादरी के बाल नहीं काटते, उल्टे अपमान करके भगा देते हैं। इसी पीड़ा को लेकर उन्होंने शनिवार को विरोध प्रदर्शन भी किया। उन्होंने पुलिस प्रशासन को तहरीर देकर मांग की है कि बार्बरों को उनके बाल काटने के आदेश जारी किए जाएं।
कोतवाली क्षेत्र के खेड़ा गांव में कल बार्बर द्वारा वाल्मीकि समुदाय के लोगों के बाल काटने से इंकार कर दिया गया। जिससे क्षुब्ध हुए वाल्मीकि समुदाय के लोगों ने शनिवार को प्रदर्शन कर आरोप लगाया कि नाई उनसे छुआछूत मानते हैं। जिसके कारण उनके बाल काटने से इंकार कर रहे है। प्रदर्शनकारी दर्जनों वाल्मीकि एकत्र होकर कोतवाली पहुंचे।
जहां उन्होंने पुलिस को तहरीर देकर अवगत कराया कि वे जब भी बार्बर शाप पर बाल कटवाने जाते है तो उनके बाल काटने से इंकार कर दिया जाता है। साथ ही वाल्मीकि होने के कारण बाल कटिंग करने वाले लोग उनसे छुआछूत मानते हुए दुर्व्यवहार करते हैं। वाल्मीकियों ने पुलिस से छुआछूत मानने वाले नाइयों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग करते हुए बाल काटवाए जाने की मांग की है। इस दौरान राजेंद्र सरजीत प्रदीप महीपाल, राजेश मटरू आदि मौजूद थे।