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रजा लाइब्रेरी का दुर्लभ संग्रह देख पाना हुआ सुलभ

Wed, 28 Dec 2016 12:47 AM IST
मोहित सक्सेना/ रामपुर
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दुनियाभर में विख्यात रजा लाइब्रेरी की पांडुलिपियों और कैलीग्राफी को लोग आसानी से पा देख रहे थे। लेकिन अब दुर्लभ प्राचीन और मध्यकालीन सिक्कों और जवाहरात को भी आसानी से देखा जा सकेगा। करीब चौदह सौ साल पुराने दुर्लभ सिक्कों का डिजिटाइजेशन शुरू हो गया है। इन सिक्कों का कंप्यूटराइज्ड क्वाइंस डिस्प्ले बोर्ड के जरिए सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शन किया जाएगा। रजा लाइब्रेरी के दरबार हाल में इन सिक्कों का प्रदर्शन प्रतिदिन किया जाएगा। यहां आने वाले लोग दुर्लभ सोने, चांदी व तांबे के सिक्कों के इतिहास से रूबरू हो सकेंगे। इसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 

 रामपुर रजा लाइब्रेरी में ऐतिहासिक पांडुलिपियों का खजाना है। ज्ञान के इस भंडार में तमाम ऐसी पांडुलिपियां हैं, जिनके जरिए अपने इतिहास से रूबरू हुआ जा सकता है। एशिया की नंबर वन लाइब्रेरी के पास जहां दुर्लभ पांडुलिपियों का संग्रह है, वहीं प्राचीन काल और मध्यकालीन इतिहास से जुड़े सिक्कों का भी संग्रह है। 1400 साल पुराने दुर्लभ सोने, चांदी व तांबे के यह सिक्के सुरक्षा के लिहाज से कड़ी सुरक्षा में रखे जाते हैं। इन सिक्कों का प्रदर्शन राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली प्रदर्शनियों में ही किया जाता था, लेकिन अब इन सिक्कों का प्रदर्शन हर रोज लाइब्रेरी में किया जाएगा।
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  सिक्कों के इतिहास से रूबरू कराने के लिए लाइब्रेरी में अब क्वाइंस डिस्प्ले बोर्ड लगाया जा रहा है। क्वाइन डिस्पले बोर्ड पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड है। इसका साफ्टवेयर तैयार कराया जा रहा है। इस बोर्ड पर इन सिक्कों की वीडियो फुटेज दिखाई जाएगी। इस वीडियो के जरिये प्रत्येक सिक्के का इतिहास भी बताया जाएगा। यह भी बताया जाएगा कि कौन सा सिक्का किस काल का है और इसकी क्या खासियत है।
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 यानी सिक्कों के इतिहास से अब रजा लाइब्रेरी देखने आने वाले लोग रूबरू हो सकेंगे। क्वाइन डिस्प्ले बोर्ड दिल्ली की एक फर्म से खरीदा गया है। इसको बहुत ही जल्द ही तैयार कर इसे जनता के सामने प्रदर्शित किया जाएगा।
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