फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सेब के बगीचों माइट का हमला, बागवान चिंतित

विज्ञापन
विज्ञापन
रोहडू़। बेमौसमी बर्फबारी, ओलावृष्टि के बाद अब सेब के बगीचों में माइट ने हमला कर दिया है। इससे बागवानों की चिंताएं बढ़ गई है। मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों के कई बगीचों में सेब के पत्तों पर माइट तेजी से फैल रहा है। इसको देखते हुए विशेषज्ञों ने बागवानों को माइट की निगरानी के लिए विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। मौसम में हुए बदलाव से सेब की फसल की माइट के संक्रमण की चपेट में आ गई है।
विज्ञापन

चिंता की बात यह है कि लॉकडाउन के बीच बागवानों को माइट के हमले ने परेशानी में डाल दिया है। बागवानी विभाग के पास अब माइट की रोकथाम के लिए उपयोग होने वाले दवाइयां भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बागवानों को बाजार से मंहगे दाम पर दवाइयां खरीदना पड़ रही है। पहले हिमपात और ओलावृष्टि के कारण सेब की फसल को काफी नुकसान हो चुका है। अब माइक की बीमारी ने बागवानों की चिंताएं बढ़ा दी है।
सेब उत्पादक क्षेत्रों में माइट का हमला तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस बीमारी का प्रमुख कारण मौसम में आर्द्रता, नमी और धूप का मिश्रण है। सेब के पत्तों के निचले भाग पर माइट यानी एक मकड़ी अंडे देता है। गर्मी बढ़ने के साथ माइट का अंडा कीट में बदल जाता है। इसके बाद छोटे-छोटे माइट पौधों के पत्तों के हरे भाग को क्षतिग्रस्त करना शुरू कर देते है। इससे पौधे में फल का विकास रुक जाता है। समय से पहले पत्ते खराब होने लगते है।
विज्ञापन

रोहडू़ उपमंडल में हाटकोटी कुड्डू, पटसारी, कोटखाई के गुम्मा सहित कम ऊंचाई वाले क्षेत्र में माइट के अंडे तेजी से तैयार हो रहे हैं। बागवान सुरेश चौहान और भोपिंद्र सिंह राकेश ने बताया कि पहले उद्यान विभाग के पास माइट की दवाइयां कम दाम पर मिल जाती थी। अब उन्हें बाजार से मंहगे दाम पर इन दवाइयों को खरीदना पड़ रहा है। उनका कहना है कि बागवानों को ओलावृष्टि और हिमपात से पहले ही भारी नुकसान हो चुका है।
अब बची फसल को कीट से बचाने के लिए बाजार से मंहगी दवाइयां खरीदना पड़ रही है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं बागवानी विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कायथ ने कहा कि माइट पर नियंत्रण के लिए बगीचों में माइट साइड का छिड़काव करना होगा। उन्होंने कहा माइट पत्तों के हरे भाग को क्षतिग्रस्त कर देता है।
इससे पौधे में भोजन बनाने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि माइट की जांच के बाद ही बागवान स्प्रे करे। पहले स्प्रे की आवश्यकता नहीं रहती। उन्होंने कहा कि माइटसाइट की एक स्प्रे को बार-बार न दोहराएं। अंडे की स्टेज के लिए अलग और बारिक माइट नजर आने पर अलग स्प्रे की आवश्यकता होती है। स्प्रे से पहले बागवान विशेषज्ञ की राय जरूर लें।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें